किस डोमेन को सीखने का कॉनेटिव डोमेन भी कहा जाता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बी.एस. ब्लूम (B.S. Bloom) और उनके सहयोगियों द्वारा शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण (Taxonomy of Educational Objectives) में सीखने के मुख्य रूप से तीन डोमेन या आयाम बताए गए हैं: संज्ञानात्मक (Cognitive), भावात्मक (Affective), और क्रियात्मक या मनोप्रेरणा (Psychomotor)। क्रियात्मक डोमेन को 'कॉनेटिव' (Conative) या शारीरिक-कौशल डोमेन भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें शारीरिक गतिविधियों, मोटर स्किल्स, मांसपेशियों के समन्वय और व्यावहारिक कार्यों का निष्पादन शामिल होता है। कॉनेटिव शब्द का अर्थ इरादे, प्रयास या कार्य करने की प्रवृत्ति से है, जो सीधे तौर पर साइकोमोटर डोमेन की विशेषताओं से मेल खाता है। अतः सही उत्तर विकल्प 'c' (क्रियात्मक) है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- संज्ञानात्मक डोमेन (Cognitive Domain): यह मानसिक क्षमताओं, ज्ञान, और बौद्धिक कौशल के विकास से संबंधित है (जैसे- सोचना, तर्क करना, स्मरण करना)।
- भावात्मक डोमेन (Affective Domain): यह भावनाओं, संवेदनाओं, मूल्यों, दृष्टिकोण और रुचियों से जुड़ा हुआ है।
- क्रियात्मक डोमेन (Psychomotor / Conative): यह शारीरिक समन्वय, हस्त-कौशल और गतिविधियों से संबंधित है, जिसे कॉनेटिव डोमेन भी कहते हैं।
- गलत विकल्पों का विश्लेषण: 'संज्ञानात्मक' बौद्धिक विकास से जुड़ा है, 'भावात्मक' भावनाओं से जुड़ा है, और 'उच्च कोटि चिंतन कौशल' संज्ञानात्मक डोमेन का ही एक उन्नत हिस्सा है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण ब्लूम की टैक्सोनॉमी पर आधारित है। बाल विकास और पेडागोजी में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए इन तीनों डोमेन का एकीकृत विकास आवश्यक माना जाता है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा और शिक्षण अधिगम के सिद्धांतों को पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, DSSSB) में ब्लूम के वर्गीकरण से लगातार प्रश्न पूछे जाते हैं। कॉनेटिव डोमेन विशेष रूप से शारीरिक क्रियाओं, हस्तकला, खेलकूद और प्रायोगिक कार्यों के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कक्षा कक्ष में छात्रों के समग्र विकास (Holistic Development) के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षक ज्ञान और भावनाओं के साथ-साथ उनके व्यावहारिक व क्रियात्मक कौशलों को भी बढ़ावा दें। ऐसे वैचारिक प्रश्नों को हल करते समय शब्दावली (जैसे Psychomotor और Conative के आपसी संबंध) पर विशेष ध्यान देना चाहिए।