संचार को निम्न के बाद पूर्ण कहा जाता है-
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
संचार (Communication) शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। संप्रेषण चक्र (Communication Cycle) में वक्ता (Sender) द्वारा संदेश को कूटबद्ध (Encode) करके माध्यम से भेजा जाता है, जिसे प्राप्तकर्ता (Receiver) डिकोड करता है। परंतु यह प्रक्रिया तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक प्राप्तकर्ता उस संदेश पर अपनी प्रतिक्रिया या प्रतिपुष्टि (Feedback) प्रेषक को वापस नहीं देता। प्रतिक्रिया ही यह सुनिश्चित करती है कि संदेश का उद्देश्य सही अर्थों में समझा गया है या नहीं। इसलिए, सही उत्तर विकल्प (a) है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- संप्रेषण चक्र के प्रमुख चरण: प्रेषक, संदेश, कोडिंग, माध्यम, डिकोडिंग, प्राप्तकर्ता और प्रतिपुष्टि।
- विकल्प (b) गलत है क्योंकि केवल संदेश भेजना संचार को पूर्ण नहीं करता, जब तक वह प्राप्तकर्ता तक न पहुँचे।
- विकल्प (c) और (d) संचार के आंतरिक चरण हैं, लेकिन अंतिम चक्र प्रतिपुष्टि से ही पूरा होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक तकनीकी और बाल विकास में संप्रेषण कौशल शिक्षण को प्रभावी बनाने का मूलाधार है। अधिक जानकारी के लिए देखें शिक्षण विधियाँ और संप्रेषण।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
कक्षा कक्ष अंतःक्रिया (Classroom Interaction) में शिक्षक और छात्र के बीच द्वि-मार्गीय (Two-way) संवाद होना आवश्यक है। जब शिक्षक कोई अवधारणा पढ़ाता है, तो छात्रों के प्रश्न और उत्तर (Feedback) से ही शिक्षक को यह आकलन करने में सहायता मिलती है कि अधिगम उद्देश्य प्राप्त हुआ है या नहीं। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे CTET और UPTET में शिक्षण कौशल (Teaching Skills) के अंतर्गत संप्रेषण के घटकों से संबंधित प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं, जहाँ छात्रों को यह समझना होता है कि प्रतिपुष्टि के बिना अधिगम का चक्र अधूरा रहता है।