यह परिसंपत्ति या सेवा कार्यों को सार्वजनिक से निजी स्वामित्व या नियंत्रण में स्थानांतरित करने और बंद क्षेत्रों को केवल निजी क्षेत्र में खोलने के लिए संदर्भित करता है।
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
यहाँ प्रश्न में दी गई परिभाषा 'निजीकरण' (Privatisation) को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। निजीकरण उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसके अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों, परिसंपत्तियों या सेवाओं का स्वामित्व और नियंत्रण निजी क्षेत्र के हाथों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, जो क्षेत्र पहले केवल सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थे, उन्हें निजी कंपनियों के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाता है। भारतीय संदर्भ में 1991 के आर्थिक सुधारों (LPG नीति - उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों में निजीकरण को बढ़ावा मिला, जिसका सीधा प्रभाव हमारी शिक्षण पद्धतियों, विद्यालय प्रबंधन और शैक्षिक अवसरों की उपलब्धता पर भी पड़ा है। बाल विकास और शिक्षा शास्त्र के दृष्टिकोण से यह समझना आवश्यक है कि कैसे सामाजिक-आर्थिक नीतियां बच्चों के समाजीकरण और शिक्षा तक उनकी पहुंच को प्रभावित करती हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- निजीकरण (Privatisation): सरकारी स्वामित्व से निजी हाथों में परिसंपत्तियों और सेवाओं का हस्तांतरण।
- उदारीकरण (Liberalization): व्यापार और उद्योग पर लगे अनावश्यक सरकारी नियंत्रण और प्रतिबंधों को कम करना।
- वैश्वीकरण (Globalization): देश की अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना।
- विकल्प विश्लेषण: 'निवारण' एक भ्रामक शब्द है, जबकि उदारीकरण और वैश्वीकरण आर्थिक सुधारों के अन्य आयाम हैं जो इस परिभाषा से मेल नहीं खाते।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शिक्षा और समाजशास्त्र के अंतर्संबंधों के अंतर्गत आर्थिक नीतियों का शैक्षिक संस्थानों पर प्रभाव एक महत्वपूर्ण विषय है। अधिक जानने के लिए पढ़ें समावेशी शिक्षा और सामाजिक विकास के सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, BPSC TRE) में अक्सर सामाजिक विज्ञान और बाल विकास के संविदात्मक आधारों से प्रश्न पूछे जाते हैं। 1991 के एलपीजी सुधारों का भारतीय शिक्षा प्रणाली पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जिससे शिक्षा के बाजारीकरण और निजी विद्यालयों की संख्या में वृद्धि हुई है। शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि कैसे आर्थिक नीतियां बाल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच और सामाजिक न्याय (Social Justice) को प्रभावित करती हैं। इस प्रकार के बहुआयामी प्रश्न उम्मीदवारों के वैचारिक स्पष्टता को परखने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।