एक बच्चा जो कई भाषाओं को समझ सकता है, सीखने को प्रभावित करने वाले ........ कारक के महत्व को दर्शाता है।
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
एक बच्चा जो विभिन्न प्रकार की भाषाओं को समझ सकता है और उनमें दक्षता हासिल करता है, वह मुख्य रूप से उसके सामाजिक-सांस्कृतिक कारक (Socio-cultural factor) के प्रभाव को दर्शाता है। लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, भाषा न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि यह संज्ञानात्मक विकास का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण भी है। बच्चा अपने परिवेश, समाज, परिवार और सांस्कृतिक अंतःक्रियाओं के माध्यम से भाषा सीखता है। बहुभाषी परिवेश में पले-बढ़े बच्चे का कई भाषाओं को समझना इस बात का प्रमाण है कि उसके चारों ओर का सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचा उसकी सीखने की क्षमता को प्रत्यक्ष रूप से समृद्ध कर रहा है। इसलिए, सही उत्तर विकल्प 'c' है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- सामाजिक-सांस्कृतिक कारक: भाषा और चिंतन का विकास समाज और संस्कृति की अंतःक्रिया से गहराई से जुड़ा होता है।
- पर्यावरणीय कारक (विकल्प A): हालांकि पर्यावरण महत्वपूर्ण है, लेकिन भाषा विशेष रूप से सांस्कृतिक और सामाजिक आदान-प्रदान का उत्पाद है।
- आयु कारक (विकल्प B): आयु सीखने को प्रभावित करती है, परंतु बहुभाषिकता मुख्य रूप से परिवेश और अवसरों पर निर्भर करती है।
- मनोवैज्ञानिक कारक (विकल्प D): इसमें प्रेरणा, बुद्धि और मनोवृत्ति शामिल हैं, जो भाषा अर्जन में सहायता करते हैं परंतु प्रत्यक्ष रूप से भाषाई विविधता का कारण सामाजिक परिवेश है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास में लेव वाइगोत्स्की का मानना था कि बच्चे अपने समाज और संस्कृति के साथ संवाद करके ज्ञान का निर्माण करते हैं। अधिक जानने के लिए पढ़ें वाइगोत्स्की का सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटेट (CTET) और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों से जुड़े प्रश्न अक्सर वाइगोत्स्की के सिद्धांत के संदर्भ में पूछे जाते हैं। जब एक बालक कई भाषाएं समझता है, तो यह उसकी संज्ञानात्मक लचीलेपन और समृद्ध सामाजिक परिवेश को रेखांकित करता है। शिक्षकों को कक्षा में बहुभाषिकता (Multilingualism) को एक संसाधन के रूप में देखना चाहिए न कि एक बाधा के रूप में। यह प्रश्न बाल केंद्रीय शिक्षा और समावेशी शिक्षा की अवधारणाओं से भी जुड़ा हुआ है, जहां प्रत्येक बच्चे की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का सम्मान किया जाता है।