अधिगम के 'प्रबलन सिद्धांत' (Reinforcement Theory) के प्रतिपादक कौन माने जाते हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम के 'प्रबलन सिद्धांत' (Reinforcement Theory) या 'अंतर्नोद न्यूनीकरण सिद्धांत' (Drive Reduction Theory) के मुख्य प्रतिपादक क्लार्क एल. हल (Clark L. Hull) को माना जाता है। हल के अनुसार, जीवों में कुछ जैविक आवश्यकताएं होती हैं जो आंतरिक अंतर्नोद (Drive) को उत्पन्न करती हैं। जब किसी उद्दीपक या प्रतिक्रिया के माध्यम से उन आवश्यकताओं की पूर्ति होती है और अंतर्नोद कम होता है, तो उसे प्रबलन (Reinforcement) कहा जाता है। हल ने गणितीय और निगमनात्मक विधियों का उपयोग करके अधिगम के नियमों को स्पष्ट किया, जिसमें आदत निर्माण (Habit Formation) और पुनर्बलन की केंद्रीय भूमिका होती है। यह सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि प्राणी की मूल प्रवृत्तियों और जैविक आवश्यकताओं की संतुष्टि ही सीखने की प्रक्रिया को संचालित करती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- क्लार्क हल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'प्रिंसिपल ऑफ बिहेवियर' (Principles of Behavior, 1943) में अपने सिद्धांत का व्यापक वर्णन किया है।
- इस सिद्धांत को 'व्यवस्थित व्यवहार सिद्धांत' (Systematic Behavior Theory) के नाम से भी जाना जाता है।
- विकल्प (a) बी.एफ. स्किनर ने 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) दिया जिसमें पुनर्बलन का व्यापक प्रयोग है, किंतु मूल प्रबलन सिद्धांत के प्रतिपादक हल माने जाते हैं।
- विकल्प (c) पावलोव ने 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) और विकल्प (d) थॉर्नडाइक ने 'प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत' (Trial and Error Theory) प्रतिपादित किया था।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में क्लार्क हल का सिद्धांत प्रेरणा और अधिगम के अंतर्संबंध को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिक जानकारी के लिए अधिगम के सिद्धांत और प्रेरणा एवं अधिगम के अध्यायों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में अधिगम सिद्धांतों के प्रतिपादकों से संबंधित प्रश्न प्रत्यक्ष रूप से पूछे जाते हैं। छात्रों अक्सर स्किनर और हल के बीच भ्रमित होते हैं क्योंकि दोनों ने अपने सिद्धांतों में 'प्रबलन' (Reinforcement) शब्द का अत्यधिक उपयोग किया है। स्किनर का संबंध क्रियाप्रसूत अनुबंधन और नैमित्तिक अधिगम से है, जबकि क्लार्क हल का सिद्धांत जीव की शारीरिक आवश्यकताओं और ड्राइव रिडक्शन (Drive Reduction) पर केंद्रित है। कक्षा शिक्षण में इस सिद्धांत का अनुप्रयोग छात्रों की आंतरिक प्रेरणा को बनाए रखने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार पुरस्कार व पुनर्बलन की व्यवस्था करने में सहायक होता है।