सबसे उपयुक्त कथन का चयन करें जो “बच्चों में अच्छे संवेगात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने” के सर्वोत्तम तरीके का वर्णन करता हो।
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बच्चों में अच्छे संवेगात्मक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए उन्हें रचनात्मक और सार्थक गतिविधियों में लगातार व्यस्त या परिश्रमी (industrious) रहने देना सबसे प्रभावी तरीका है। एरिक्सन के मनोवैज्ञानिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बाल्यावस्था का एक प्रमुख चरण 'परिश्रम बनाम हीनता' (Industry vs. Inferiority) है, जहां बच्चे नए कौशल सीखते हैं, कार्य करना पसंद करते हैं और अपनी क्षमताओं का निर्माण करते हैं। जब बच्चों को उनकी योग्यताओं के अनुसार निरंतर परिश्रम करने, सीखने और उत्पादक गतिविधियों में संलग्न रहने का अवसर मिलता है, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उनका संवेगात्मक स्वास्थ्य सुदृढ़ होता है। विकल्प (c) बच्चे को सकारात्मक रूप से सक्रिय और परिश्रमी बनाए रखने की बात करता है, जो उसके संवेगात्मक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- विकल्प (a) में निष्क्रिय रहने की बात कही गई है, जो बच्चों के मानसिक और संवेगात्मक विकास में बाधक है क्योंकि सक्रिय अधिगम ही सर्वोत्तम है।
- विकल्प (b) के अनुसार खेलने के लिए पर्याप्त समय न देना बच्चों में तनाव और संवेगात्मक कुंठा को जन्म देता है, जबकि खेल बच्चों के संवेगात्मक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।
- विकल्प (d) परिवार के साथ संचार में असंगति (inconsistency) उत्पन्न करने की अनुमति देता है, जिससे पारिवारिक रिश्ते और बच्चे की सुरक्षा की भावना कमजोर होती है।
- अतः केवल विकल्प (c) ही बच्चे के सकारात्मक संवेगात्मक और संज्ञानात्मक विकास के अनुकूल है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल्यावस्था में संवेगात्मक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास का गहरा संबंध एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धांतों से है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें बाल विकास एवं मनोविज्ञान और बाल केंद्रीय शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत संवेगात्मक संतुलन के आयाम।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET और UPTET) में बाल मनोविज्ञान और संवेगात्मक स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्न अक्सर व्यावहारिक समझ पर आधारित होते हैं। 'परिश्रमी' शब्द यहाँ केवल काम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चे की जिज्ञासा, रचनात्मकता, और उद्देश्यपूर्ण कार्यों में संलग्न रहने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। एक शिक्षक के रूप में यह समझना अनिवार्य है कि बच्चे को निष्क्रिय रखना या उसके खेलने के अधिकार को छीनना उसके संवेगात्मक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा सकता है। इसके विपरीत, उन्हें लगातार सीखने और उत्पादक कार्यों में संलग्न रखकर स्वस्थ संवेगात्मक वातावरण प्रदान किया जा सकता है।