किस मनोवैज्ञानिक ने संज्ञानात्मक विकास में भाषा की भूमिका पर अधिक जोर दिया है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) ने अपने सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Socio-Cultural Theory) में संज्ञानात्मक विकास में 'भाषा' (Language) और 'संस्कृति' (Culture) को केंद्रीय एवं सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया है। वाइगोत्स्की का मानना था कि बच्चे का संज्ञानात्मक विकास अकेले नहीं होता, बल्कि समाज और वयस्कों के साथ अंतःक्रिया (Social Interaction) के माध्यम से होता है। इसमें भाषा न केवल विचारों को संप्रेषित करने का माध्यम है, बल्कि यह उच्च मानसिक प्रक्रियाओं (Higher Mental Functions) को आकार देने का मुख्य उपकरण भी है। उन्होंने 'निजी भाषा' (Private Speech) की अवधारणा दी, जिसके जरिए बच्चे अपने व्यवहार और चिंतन को खुद निर्देशित करते हैं, जो बाद में आंतरिक भाषण (Inner Speech) में बदल जाती है। इसके विपरीत, जीन पियाजे मानते थे कि पहले बच्चे का संज्ञानात्मक विकास होता है और भाषा उसी विकास का अनुसरण करती है, यानी विचार पहले आते हैं और भाषा बाद में।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- वाइगोत्स्की (Vygotsky): भाषा और संस्कृति संज्ञानात्मक विकास की नींव हैं; सामाजिक अंतःक्रिया सबसे पहले होती है।
- पियाजे (Piaget): बच्चे 'नन्हे वैज्ञानिक' हैं जो अपने पर्यावरण के साथ खुद खोजबीन करके सीखते हैं; उन्होंने भाषा को विकास का गौण परिणाम माना।
- एरिक्सन (Erikson): इन्होंने मनो-सामाजिक विकास (Psychosocial Development) का सिद्धांत दिया जिसमें जीवन भर के 8 चरणों का वर्णन है।
- फ्रायड (Freud): इन्होंने मनो-विश्लेषणवाद (Psychoanalysis) और मनो-लैंगिक विकास (Psychosexual Development) के सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में लेव वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य यह स्पष्ट करता है कि कैसे भाषा सामाजिक परिवेश से आंतरिक संज्ञान तक की यात्रा तय करती है। अधिक जानकारी के लिए वाइगोत्स्की का सिद्धांत और जीन पियाजे का सिद्धांत के तुलनात्मक अध्ययन को पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और KVS) में वाइगोत्स्की और पियाजे के बीच भाषा और विचार के संबंधों पर आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। वाइगोत्स्की के अनुसार, भाषा विकास के प्रारंभिक वर्षों में सामाजिक भाषण (Social Speech), निजी भाषण (Private Speech) और आंतरिक भाषण (Inner Speech) के रूप में विकसित होती है। जबकि पियाजे ने अहंकेन्द्रित वाक् (Egocentric Speech) को बचकानी सीमा माना, वाइगोत्स्की ने इसे संज्ञानात्मक विकास का एक सशक्त साधन माना। परीक्षा हल करते समय यह ध्यान रखें कि जहाँ भी 'समाज', 'संस्कृति', 'एमकेओ (MKO)' या 'जैडपीडी (ZPD)' के साथ भाषा की प्रधानता हो, वहाँ उत्तर हमेशा लेव वाइगोत्स्की होगा।