निम्नलिखित में से कौन प्याजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त का चरण नहीं है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन प्याजे (Jean Piaget) का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत बाल विकास और मनोविज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। इस सिद्धांत के अनुसार, बच्चों का मानसिक विकास विभिन्न चार चरणों से होकर गुजरता है। ये चार चरण क्रमशः हैं- (1) संवेदी-पेशीय अवस्था (Sensorimotor Stage: जन्म से 2 वर्ष), (2) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage: 2 से 7 वर्ष), (3) ठोस या मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage: 7 से 11 वर्ष), तथा (4) औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage: 11 वर्ष से ऊपर)। दिए गए विकल्पों में 'विलंबता चरण' (Latency Stage) पियाजे के संज्ञानात्मक विकास का चरण नहीं है, बल्कि यह सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनो-लैंगिक विकास (Psychosexual Development) सिद्धांत का एक चरण है जो लगभग 6 वर्ष से यौवनारंभ तक होता है। अतः विकल्प (b) इस प्रश्न का सही उत्तर है क्योंकि यह प्याजे के सिद्धांत से संबंधित नहीं है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- प्याजे के संज्ञानात्मक विकास में कुल चार अवस्थाएं होती हैं, जिनमें कोई भी विलंबता चरण शामिल नहीं है।
- विकल्प (a) औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था प्याजे के सिद्धांत की अंतिम (चौथी) अवस्था है जिसमें अमूर्त चिंतन शुरू होता है।
- विकल्प (c) ठोस-संक्रियात्मक अवस्था तीसरी अवस्था है जिसमें बालक तार्किक रूप से मूर्त वस्तुओं पर विचार करना सीखता है।
- विकल्प (d) संवेदी-पेशीय अवस्था पहली अवस्था है जिसमें बच्चा अपनी इंद्रियों और मोटर कौशल के माध्यम से सीखता है।
- अन्य मनोवैज्ञानिकों के सिद्धांतों जैसे फ्रायड के मनो-लैंगिक चरणों को प्याजे के संज्ञानात्मक चरणों के साथ भ्रमित नहीं होना चाहिए।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन प्याजे स्विट्जरलैंड के एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने बच्चों के ज्ञान निर्माण (Constructivism) पर अभूतपूर्व कार्य किया। उनके अनुसार बच्चे सक्रिय अन्वेषक होते हैं जो दुनिया के बारे में अपने ज्ञान का निर्माण खुद करते हैं। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें जीन पियाजे का सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में जीन प्याजे के चरणों के नाम, आयु वर्ग और उनकी विशेषताओं से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। प्रश्नपत्रों में अक्सर ऐसे विकल्प दिए जाते हैं जो अन्य मनोवैज्ञानिकों (जैसे फ्रायड या एरिक्सन) के सिद्धांतों से संबंधित होते हैं ताकि विद्यार्थियों की वैचारिक स्पष्टता की जांच की जा सके। शिक्षार्थियों को सभी चरणों के सही क्रम और उनकी मुख्य विशेषताओं (जैसे वस्तु स्थायित्व, संरक्षण, अमूर्त चिंतन आदि) को अच्छी तरह याद रखना चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।