प्याजे का मानना है कि बच्चे अपने मन में मानसिक संरचना का निर्माण करते हैं। उन्हें क्या कहा जाता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बच्चे सक्रिय ज्ञान निर्माता होते हैं जो दुनिया के साथ अंतःक्रिया करते हुए अपने परिवेश की समझ विकसित करते हैं। पियाजे ने यह स्पष्ट किया कि बच्चे अपने मस्तिष्क में ज्ञान के संगठित पैटर्न या मानसिक संरचनाओं का निर्माण करते हैं, जिन्हें 'स्कीमा' (Schema) कहा जाता है। स्कीमा हमारे दिमाग में जानकारी का एक खाका या संचित ज्ञान का भंडार होता है, जिसकी मदद से हम नई परिस्थितियों को समझते हैं और प्रतिक्रिया देते हैं। जब कोई बच्चा किसी वस्तु या अनुभव का सामना करता है, तो वह अपने पूर्व-स्थापित स्कीमा का उपयोग करता है। इस प्रकार, मानसिक संरचनाओं का यह मूल निर्माण खंड स्कीमा कहलाता है, जो संपूर्ण संज्ञानात्मक विकास की नींव रखता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- स्कीमा (Schema): मानसिक संरचनाओं और ज्ञान के संगठित पैटर्न्स को स्कीमा कहा जाता है।
- आत्मसात्करण (Assimilation): जब बच्चा नई जानकारी को अपने मौजूदा स्कीमा में बिना किसी बदलाव के जोड़ता है।
- आवास/समंजन (Accommodation): जब नई जानकारी के अनुकूल होने के लिए मौजूदा स्कीमा में बदलाव किया जाता है या नया स्कीमा बनाया जाता है।
- विकल्प विश्लेषण: 'कोड' कोई पियाजियन संज्ञानात्मक पद नहीं है; आवास और आत्मसात्करण स्कीमा में संशोधन और एकीकरण की प्रक्रियाएं हैं, न कि स्वयं मानसिक संरचनाएं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत यह रेखांकित करता है कि बच्चे कैसे सीखते हैं और ज्ञान का निर्माण करते हैं। अधिक जानकारी के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS) में जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। 'स्कीमा' शब्द का अर्थ समझने से परीक्षार्थी 'आत्मसात्करण' और 'समायोजन' जैसी जटिल प्रक्रियाओं को आसानी से समझ सकते हैं। कक्षा कक्ष में एक शिक्षक को बच्चों के पूर्व ज्ञान (स्कीमा) को ध्यान में रखकर ही शिक्षण योजना बनानी चाहिए ताकि सार्थक अधिगम हो सके।