अधिगम के किस सिद्धांत में 'अंतर्दृष्टि' (Insight) को 'अचानक सूझ' माना गया है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम के गेस्टाल्ट सिद्धांत (Gestalt Theory of Learning) के अनुसार, सीखना किसी यांत्रिक प्रक्रिया या केवल प्रयास एवं त्रुटि का परिणाम नहीं है, बल्कि यह परिस्थिति को समग्र रूप से देखने और उसमें अचानक छिपे हुए संबंधों को समझ लेने पर आधारित है। इसे ही 'अंतर्दृष्टि' (Insight) या सूझ का सिद्धांत कहा जाता है। इसके प्रतिपादक मैक्स वर्दीमर, कोहलर और कोफ्का थे। कोहलर ने चिम्पांजी (सुल्तान) पर प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि जब प्राणी किसी समस्या का सामना करता है, तो वह पूरी स्थिति का अवलोकन करता है और अचानक उसके मस्तिष्क में समाधान आ जाता है जिसे 'अचानक सूझ' या 'अहा अनुभव' (Aha! Experience) कहते हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- गेस्टाल्ट एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ 'समग्र रूप' (Whole or Configuration) होता है।
- विकल्प (a) शास्त्रीय अनुबंधन पावलाव द्वारा दिया गया था, जो उत्तेजना और अनुक्रिया के सहचरी संबंध पर आधारित है।
- विकल्प (c) प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत थार्नडाइक द्वारा दिया गया है, जिसमें सीखने की प्रक्रिया क्रमिक और यांत्रिक होती है।
- विकल्प (d) स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत प्रबलन (Reinforcement) पर आधारित है, न कि अचानक सूझ पर।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान प्रत्यक्षज्ञान (Perception) और संज्ञानात्मक पुनर्गठन पर जोर देता है। यह इस बात को रेखांकित करता है कि मानसिक रूप से किसी समस्या के विभिन्न पहलुओं को एक साथ जोड़कर देखना ही अंतर्दृष्टि है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें अधिगम सिद्धांत और विधियाँ।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET) में कोहलर के सूझ के सिद्धांत से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। परीक्षा में यह पूछा जा सकता है कि प्रयोग में चिम्पांजी का नाम क्या था (सुल्तान) या गेस्टाल्ट वादियों का मुख्य दृष्टिकोण क्या था। कक्षा कक्ष शिक्षण में, शिक्षकों को छात्रों को केवल रटने के बजाय समस्याओं को समग्र रूप से विश्लेषित करने और स्वतः समाधान ढूँढने के अवसर प्रदान करने चाहिए, जिससे उनकी संज्ञानात्मक क्षमताओं और तार्किक चिंतन का विकास हो सके। यह दृष्टिकोण बाल-केंद्रित शिक्षा की अवधारणा को भी मजबूत करता है जहाँ छात्र खुद खोजबीन करके सीखते हैं (Discovery Learning)।