अधिगम के 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) में 'पुनर्बलन' (Reinforcement) के स्थान पर पावलोव ने किस शब्द का प्रयोग किया?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
इवान पावलोव द्वारा प्रतिपादित 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) अधिगम के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अधिगम का सिद्धांत है। इस सिद्धांत में सीखने की प्रक्रिया मुख्य रूप से उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के साहचर्य पर आधारित होती है। यहाँ पारंपरिक रूप से जिसे बाद के मनोवैज्ञानिकों (विशेषकर स्किनर) द्वारा 'पुनर्बलन' (Reinforcement) कहा गया, पावलोव ने उसके लिए मुख्य रूप से 'उद्दीपक' (Stimulus) विशेषकर 'स्वाभाविक उद्दीपक' (Unconditioned Stimulus जैसे भोजन) और 'कृत्रिम/अनुकूलित उद्दीपक' (Conditioned Stimulus जैसे घंटी) के मध्य साहचर्य को महत्व दिया। पावलोव के प्रयोग में भोजन स्वाभाविक उद्दीपक था जो कुत्ते के लार स्राव के लिए जिम्मेदार था, और घंटी एक तटस्थ उद्दीपक था जिसे बाद में अनुकूलित उद्दीपक बना दिया गया। अतः पावलोव ने अनुबंधन की पूरी प्रक्रिया में 'उद्दीपक' के प्रतिस्थापन (Stimulus Substitution) पर अत्यधिक बल दिया।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- पावलोव ने अपने प्रयोग में कुत्ते पर लार (Salivation) का अध्ययन किया जिसके लिए उन्हें 1904 में नोबेल पुरस्कार मिला।
- इस सिद्धांत को S-R टाइप कंडीशनिंग या प्रतिस्थापन सिद्धांत (Substitution Theory) भी कहा जाता है।
- विकल्प (b) अनुक्रिया जीव द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रिया है। विकल्प (c) और (d) अन्य मनोवैज्ञानिक प्रणालियों से संबंधित हैं।
- यहाँ सही विकल्प (a) उद्दीपक (Stimulus) है क्योंकि पावलोव के अनुसार अनुबंधन तब मजबूत होता है जब तटस्थ उद्दीपक को स्वाभाविक उद्दीपक के साथ बार-बार प्रस्तुत किया जाता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास और शिक्षाशास्त्र में अधिगम के सिद्धांतों का विशेष स्थान है, जहाँ पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत व्यवहारवाद की नींव रखता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं जैसे CTET, UPTET, HTET और BPSC TRE में शास्त्रीय अनुबंधन से संबंधित प्रश्न अक्सर उसकी शब्दावली (जैसे UCS, UCR, CS, CR) और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर आधारित होते हैं। कक्षाओं में विद्यार्थियों के अंदर भय, आदत निर्माण, और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में यह सिद्धांत अत्यधिक उपयोगी है। शिक्षकों को यह समझना चाहिए कि कैसे एक तटस्थ उद्दीपक (जैसे स्कूल की घंटी) अनुकूलित उद्दीपक में बदलकर छात्रों की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है। परीक्षा में अक्सर भ्रमित करने के लिए 'पुनर्बलन' शब्द स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन से जोड़कर पूछा जाता है, जबकि पावलोव के संदर्भ में मुख्य फोकस उद्दीपक के साहचर्य और प्रतिस्थापन पर होता है।