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कार्नवालिस ने न्यायिक सुधारों के अंतर्गत किस स्तर पर अदालतों की स्थापना की थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कार्नवालिस ने जिला और प्रांतीय स्तर पर दीवानी और फौजदारी अदालतों का एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया था।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैविक कार्बन सिंक' (Biological Carbon Sinks) और 'ब्लू कार्बन' (Blue Carbon) इकोसिस्टम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ब्लू कार्बन' (Blue Carbon) से तात्पर्य उस कार्बन से है जो विश्व के महासागरों और तटीय पारिस्थितिकी प्रणालियों—विशेषकर मैंग्रोव (Mangroves), नमक दलदलों (Salt Marshes) और समुद्री घास के मैदानों (Seagrass Meadows)—द्वारा प्रग्रहण (Capture) और संचित किया जाता है, और ये प्रणालियाँ उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की तुलना में प्रति इकाई क्षेत्र अधिक तेजी से कार्बन को अलग (Sequestrate) करती हैं।
2. संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के अंतर्गत 'REDD+' तंत्र मुख्य रूप से महासागरीय और तटीय 'ब्लू कार्बन' पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जबकि स्थलीय वनों को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
3. वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने के उपरांत महासागरीय जल में कार्बनिक पदार्थों के क्षय के कारण महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification) की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे समुद्र के पीएच (pH) मान में वृद्धि होती है और कैल्सीफाइंग जीवों (जैसे प्रवाल भित्तियों) के निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) और 'नमामि गंगे कार्यक्रम' के प्रावधानों और संस्थागत तंत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की स्थापना 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' के अंतर्गत वर्ष 2011 में एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में की गई थी, जिसे बाद में 'राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण' (NGRBA) के स्थान पर गठित 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) के समग्र नियंत्रण और अधीक्षण के अधीन रखा गया है।
2. 'नमामि गंगे कार्यक्रम' एक समेकित केंद्रीय क्षेत्र की पहल (Central Sector Initiative - 100% funding by Central Government) है, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से समाप्त करना तथा उसके संरक्षण और पुनर्जीवन को सुनिश्चित करना है, और इसके तहत नदी बेसिन में किसी भी राज्य सरकार या स्थानीय निकाय को वित्तीय सहायता प्रदान करने का कोई प्रावधान नहीं है।
3. राष्ट्रीय गंगा परिषद (NGC), जिसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री करते हैं, गंगा नदी बेसिन के प्रदूषण निवारण और पुनर्जीवन से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए सर्वोच्च नीति निर्माण निकाय है, और इसके सदस्यों में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्रालयों के मंत्री शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधाई संबंधों (Centre-State Legislative Relations - Articles 245-255) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, तथा किसी राज्य के विधानमंडल को उस राज्य के संपूर्ण या किसी भाग के लिए कानून बनाने की अधिकारिता है, किंतु संसद को ऐसे राज्य-क्षेत्रीय अतीत-प्रभावी (Extraterritorial) कानून बनाने की शक्ति प्राप्त नहीं है जो भारत के बाहर लागू होते हों।
2. अनुच्छेद 249 के अंतर्गत यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर कानून बनाए, तो संसद पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
3. अनुच्छेद 254 के अनुसार यदि समवर्ती सूची (Concurrent List) के किसी विषय पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून संसद द्वारा पहले बनाए गए या बाद में बनाए गए किसी कानून के उपबंध के विरुद्ध (Repugnant) होता है, तो संसद द्वारा निर्मित कानून ही मान्य होगा, चाहे राज्य का कानून राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित रखा गया हो और उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल गई हो या नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संसद के 'विशेषाधिकार प्रस्ताव' (Privilege Motion) तथा संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों के हनन (Breach of Privilege) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विशेषाधिकार प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन के किसी भी सदस्य द्वारा उस मंत्री या सदस्य के विरुद्ध लाया जा सकता है, जिस पर यह आरोप हो कि उसने सदन या उसके किसी सदस्य के विशेषाधिकारों का हनन किया है या सदन के समक्ष तथ्यात्मक रूप से गलत, भ्रामक या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किए गए तथ्यों के माध्यम से सदन को गुमराह किया है।
2. लोकसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव की ग्राह्यता (Admissibility) पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) के पास होता है, और अध्यक्ष इस मामले को सीधे तौर पर प्रारंभिक जांच के लिए 'विशेषाधिकार समिति' (Privilege Committee) के पास भेज सकते हैं या स्वयं सदन में इस पर बहस की अनुमति दे सकते हैं।
3. 'संसद में प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियम' के अनुसार, यदि किसी मंत्री के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस संबंधित मंत्री को अपने बचाव में सदन में व्यक्तिगत स्पष्टीकरण देने का कोई संवैधानिक या प्रक्रियात्मक अवसर नहीं दिया जाता है, क्योंकि सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत मंत्रिपरिषद स्वतः दोषी मानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 76' के अंतर्गत 'भारत के महान्यायवादी' (Attorney General for India) के पद, शक्तियों और उसके विशेषाधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान्यायवादी भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है, और उसे भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, साथ ही उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार भी है, किंतु उसे संसद में मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है।
2. संविधान के अनुसार, महान्यायवादी को वही पारिश्रमिक प्राप्त होता है जो संसद द्वारा निर्धारित किया जाता है, और उसका कार्यकाल संविधान द्वारा निश्चित किया गया है जो कि सामान्यतः 5 वर्ष होता है।
3. महान्यायवादी अपने पद पर राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) धारण करता है, और वह कोई ऐसा निजी विधिक अभ्यास (Private legal practice) नहीं कर सकता है जो भारत सरकार के खिलाफ या उसके हितों के प्रतिकूल हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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