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बेतवा नदी यमुना से किस स्थान पर मिलती है?

Detailed Explanation

बेतवा नदी हमीरपुर के पास यमुना में मिलती है।
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→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-A' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51A) तथा इनसे संबंधित विभिन्न कानूनी और न्यायिक पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के मूल पाठ में 'मूल कर्तव्यों' का कोई प्रावधान नहीं था, इन्हें स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें अनुच्छेद 51A के अंतर्गत एक ही खंड में शामिल किया गया है। 2. 'वर्षा कुमार बनाम भारत संघ' और अन्य ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, मूल कर्तव्य प्रकृति में केवल नागरिकों के लिए बाध्‍यकारी (Enforceable by law) हैं, जिसका अर्थ है कि विधायिका या कार्यपालिका द्वारा इन कर्तव्यों के उल्लंघन पर सीधे दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए कानून बनाए जा सकते हैं, और अदालतें भी नागरिकों को इन कर्तव्यों का पालन करने के लिए रिट (Writs) जारी कर सकती हैं। 3. न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति (1999), जिसे 'मूल कर्तव्यों के शिक्षण और पुनरुत्थान' के लिए गठित किया गया था, ने यह सिफारिश की थी कि मूल कर्तव्यों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मौजूदा कानूनों (जैसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम) का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए ताकि नागरिक अपने संवैधानिक दायित्वों के प्रति जागरूक हो सकें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 371' और उसके विभिन्न उप-अनुच्छेदों के तहत राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम और सिक्किम आदि) के लिए विशेष प्रावधानों और क्षेत्रीय स्वायत्तता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के भाग XXI (अस्थाई, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध) के अंतर्गत अनुच्छेद 371A नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान करता है, जिसके तहत संसद का कोई भी अधिनियम जो नागालैंड के धार्मिक या सामाजिक प्रथागत कानूनों, रूढ़िगत न्याय और भूमि के स्वामित्व या हस्तांतरण से संबंधित हो, तब तक राज्य में लागू नहीं होगा जब तक कि नागालैंड की विधान सभा एक संकल्प द्वारा इसे अनुमोदित नहीं कर देती। 2. अनुच्छेद 371F सिक्किम राज्य से संबंधित विशेष प्रावधान प्रदान करता है, जिसके तहत सिक्किम के भारत में विलय के पश्चात वहाँ के मूल निवासियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए राज्यपाल को विशेष उत्तरदायित्व सौंपा गया है, तथा संसद द्वारा अधिनियमित कोई भी केंद्रीय कानून सिक्किम में स्वतः लागू नहीं होता जब तक कि राष्ट्रपति द्वारा विशेष आदेश न दिया जाए। 3. अनुच्छेद 371D और 371E आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक रोजगार के मामलों में स्थानीय लोगों के लिए विशेष अवसरों और समान सुविधाओं के प्रावधान से संबंधित हैं, जिन्हें संसद द्वारा विधि बनाकर और राष्ट्रपति के आदेश से लागू किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 'हरित जमा (Green Deposits)' फ्रेमवर्क और संधारणीय वित्त (Sustainable Finance) पहलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हरित जमा फ्रेमवर्क के अंतर्गत विनियमित संस्थाओं (REs) को यह अनुमति दी गई है कि वे ग्राहकों से ऐसी जमा राशि स्वीकार करें जिनका उपयोग विशेष रूप से ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवहन और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल अन्य सतत परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाए। 2. इस फ्रेमवर्क के अनुसार, हरित जमा के तहत जुटाई गई धनराशि का आवंटन केवल भारत के भीतर की जाने वाली परियोजनाओं तक ही सीमित है, और इसके लिए तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-party verification) या प्रभाव मूल्यांकन अनिवार्य रूप से कराना आवश्यक है। 3. भारतीय रिज़र्व बैंक के इन दिशा-निर्देशों के तहत, वाणिज्यिक बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 'हरित जमा' के उपयोग और प्रबंधन का एक स्वतंत्र लेखा-परीक्षण (Independent Audit) प्रकाशित करना अनिवार्य किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (1) गुप्त काल के दौरान 'भूमि अनुदान' (अग्रहार) की प्रथा में अत्यधिक वृद्धि हुई। (2) इस काल में 'सामंतवाद' के उदय के स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार - अनुच्छेद 12 से 35) तथा 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) एवं 'संविधान संशोधन की शक्ति' (Article 368) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत के निर्णय द्वारा यह प्रतिपादित किया गया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, जिसमें मूल अधिकार भी शामिल हैं, किंतु संसद 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण नहीं कर सकती है। 2. संविधान का अनुच्छेद 13 (2) यह स्पष्ट रूप से प्रावधानित करता है कि राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है, तथा इस खंड के उल्लंघन में बनाई गई प्रत्येक विधि उल्लंघन की मात्रा तक शून्य (Void) होगी, और इसके अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अलावा अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा (Custom or Usage) भी शामिल हैं। 3. गोलकनाथ वाद (1967) में उच्चतम न्यायालय ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया था कि संसद को मूल अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति नहीं है, और मूल अधिकार 'दिव्य रूप से पवित्र' (Transcendental and Immutable) हैं, जिसे पलटने के लिए ही संसद ने 24वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 पारित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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