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राजा राममोहन राय किस तरह की शिक्षा के समर्थक थे?

Detailed Explanation

वे तर्कसंगत और आधुनिक पाश्चात्य शिक्षा के समर्थक थे।
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→ भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत स्थापित 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) एक सांविधिक (Statutory) निकाय है, जिसका मुख्य कार्य देश की जैविक संसाधनों तक पहुँच और उनके उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभों के न्यायसंगत बँटवारे (ABS) को विनियमित करना है। 2. यह प्राधिकरण देश के भीतर किसी भी भारतीय नागरिक या भारतीय पंजीकृत कंपनियों द्वारा जैव संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य बनाता है, चाहे संसाधन का उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो। 3. राज्य स्तर पर स्थापित 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) के परामर्श के बिना केंद्रीय स्तर पर NBA किसी भी विदेशी व्यक्ति, कंपनी या अनिवासी भारतीयों (NRIs) को जैविक संसाधनों के हस्तांतरण से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के आवेदन पर निर्णय नहीं दे सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उनके निर्माण तथा जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महासागरीय धाराएँ महासागरीय जल का एक निश्चित दिशा में बड़े पैमाने पर सतत प्रवाह है, जो पृथ्वी के घूर्णन (Coriolis Force), प्रचलित हवाओं (Prevailing Winds), तापमान और लवणता में भिन्नता तथा महाद्वीपीय तटरेखाओं के आकार से प्रभावित होती हैं। 2. उत्तरी गोलार्ध में कोरिऑलिस बल के प्रभाव से महासागरीय धाराएँ अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं, जो ग्याइरस (Gyres) के निर्माण के लिए उत्तरदायी है। 3. ठंडी महासागरीय धाराएँ उन क्षेत्रों में वर्षा में वृद्धि करती हैं जहाँ से वे गुजरती हैं, क्योंकि ठंडा जल वाष्पीकरण को अत्यधिक बढ़ावा देता है, जिसके परिणामस्वरूप तटीय क्षेत्रों में घने जंगलों और उष्णकटिबंधीय मरुस्थलों का निर्माण होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) तथा आठवीं अनुसूची से जुड़े प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (1, 2, 3 आदि) होगा, किंतु राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह संसद की पूर्व अनुमति के बिना राजकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा के निरंतर प्रयोग को अधिकृत कर सकता है। 2. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें समय-समय पर विभिन्न संविधान संशोधनों के माध्यम से बढ़ाया गया, जिसके तहत 21वें संशोधन द्वारा सिंधी को, 71वें संशोधन द्वारा कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को, तथा 92वें संशोधन द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को शामिल किया गया, जिससे वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ हैं। 3. संविधान का अनुच्छेद 351 संघ का यह कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए संस्कृत भाषा से शब्द ग्रहण करते हुए मुख्य रूप से उसकी शब्दावली को पूरी तरह से संस्कृतनिष्ठ (Sanskritised) बनाए, जिसमें अन्य भारतीय भाषाओं (आठवीं अनुसूची की भाषाओं) के शब्दों को शामिल करना प्रतिबंधित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → विद्रोहियों ने किसे भारत का सम्राट घोषित किया था? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 123' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति' (Ordinance-making Power) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति किसी अध्यादेश को केवल तभी प्रख्यापित कर सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में नहीं होते हैं, और राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है। 2. अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति संसद की विधि बनाने की शक्ति के समान व्यापक होती है, जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति उन सभी विषयों पर अध्यादेश जारी कर सकता है जिन पर संसद कानून बना सकती है, और इसके तहत संविधान के किसी भी प्रावधान में संशोधन भी किया जा सकता है। 3. संसद के पुनः समवेत होने पर प्रत्येक अध्यादेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाना अनिवार्य होता है, और यदि संसद के पुनर्गठन के बाद दोनों सदनों द्वारा इसे अस्वीकार करने वाला संकल्प पारित कर दिया जाता है, तो यह अध्यादेश संसद द्वारा अनुमोदन न मिलने पर तुरंत निष्प्रभावी हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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