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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 76 के तहत भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों की 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) की प्रक्रिया और उसके संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास निहित है, और यह प्रावधान केवल साधारण विधेयकों (Ordinary Bills) तथा वित्तीय विधेयकों (Financial Bills श्रेणी-I) के मामलों में ही लागू होता है, किंतु यह धन विधेयकों (Money Bills) और संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) के संबंध में लागू नहीं होता है।
2. यदि किसी साधारण विधेयक पर विचार करने और उसे पारित करने के संबंध में दोनों सदनों के बीच गतिरोध उत्पन्न हो जाता है और राष्ट्रपति संयुक्त बैठक आहूत करने के अपने आशय की सूचना संदेश द्वारा दे देता है, तो इसके पश्चात राज्यसभा विधेयक को पारित करने के लिए कोई नया कदम नहीं उठा सकती है और बैठक रद्द मानी जाती है।
3. संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित हैं, तो लोकसभा के उपाध्यक्ष, या उनकी भी अनुपस्थिति में राज्यसभा के उपसभापति द्वारा इसकी अध्यक्षता की जाती है, किंतु राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं क्योंकि वे संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों के बीच तुलनात्मक अंतर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति किसी भी ऐसे मामले में जिसमें दंड या दंडादेश ऐसे कानून के विरुद्ध दिया गया है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, क्षमादान दे सकता है, जबकि राज्यपाल की क्षमादान शक्ति का विस्तार केवल उन मामलों तक सीमित है जिन पर राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है।
2. राष्ट्रपति मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा (Pardon), निलंबित या कम कर सकता है, जबकि संविधान के अनुसार राज्यपाल को मृत्युदंड के मामलों में किसी भी प्रकार की क्षमादान या परिहार की शक्ति प्राप्त नहीं है।
3. न्यायालय द्वारा दिए गए 'सेना न्यायालय' (Court Martial) द्वारा किसी भी अधिकारी या सैनिक को दिए गए दंड या दंडादेश के विरुद्ध केवल राष्ट्रपति ही क्षमादान दे सकता है, राज्यपाल को सैन्य न्यायालयों के निर्णयों के संबंध में कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'संघ और राज्यों के बीच प्रशासनिक संबंध' (Administrative Relations - अनुच्छेद 256 से 263) तथा उससे संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 256 के अनुसार प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा जिससे संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और उस राज्य में लागू किसी भी पूर्ववर्ती केंद्रीय कानून का अनुपालन सुनिश्चित हो सके, और संघ सरकार को यह शक्ति प्राप्त है कि वह इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राज्य को आवश्यक निर्देश दे सके।
2. संविधान के अनुच्छेद 262 के अंतर्गत संसद को विधि द्वारा किसी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित किसी विवाद या शिकायत के न्यायनिर्णयन के लिए उपबंध करने की शक्ति प्राप्त है, और संसद विधि द्वारा यह भी उपबंध कर सकती है कि ऐसे किसी भी विवाद में उच्चतम न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय की अधिकारिता (Jurisdiction) नहीं होगी।
3. संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय यह प्रतीत हो कि एक अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) की स्थापना से लोकहित की प्राप्ति होगी, तो वह ऐसी परिषद की स्थापना कर सकता है, और यह परिषद अनिवार्य रूप से एक स्थायी सांविधिक निकाय (Permanent Statutory Body) है जिसकी स्थापना संसद के एक अधिनियम के माध्यम से की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राजा राममोहन राय किस तरह की शिक्षा के समर्थक थे?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 105' के अंतर्गत संसद सदस्यों के 'संसदीय विशेषाधिकार' (Parliamentary Privileges) और 'अनुच्छेद 194' के तहत राज्य विधानमंडल के सदस्यों के विशेषाधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान द्वारा संसद या इसके सदस्यों को विशिष्ट रूप से कोई भी नया विशेषाधिकार स्थायी रूप से परिभाषित नहीं किया गया है, बल्कि यह प्रावधान किया गया है कि इसके विशेषाधिकार वही होंगे जो ब्रिटेन की 'हाउस ऑफ कॉमन्स' (House of Commons) के पास संविधान लागू होने के समय थे।
2. संसद सदस्यों को सदन के भीतर या उसकी किसी समिति में कही गई किसी भी बात या दिए गए किसी भी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में किसी भी प्रकार की कार्यवाही से पूर्ण उन्मुक्ति (Immunity) प्राप्त होती है, और यह उन्मुक्ति उनके सदन की सदस्यता समाप्त होने के बाद भी बनी रहती है।
3. जब संसद का सत्र चल रहा हो, तब संसद के सदस्यों को किसी दीवानी मामले (Civil Cases) में सदन के आरंभ होने से 40 दिन पूर्व और उसकी समाप्ति के 40 दिन बाद तक गिरफ्तार किए जाने से छूट (Freedom from arrest) का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, चाहे मामला आपराधिक हो या दीवानी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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