शिक्षण में 'सूक्ष्म शिक्षण' (Micro Teaching) का प्रतिपादन किसने किया था?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
शिक्षण में 'सूक्ष्म शिक्षण' (Micro Teaching) की अवधारणा का प्रतिपादन वर्ष 1963 में अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में डॉ. डी. डब्ल्यू. एलन (Dr. Dwight W. Allen) द्वारा किया गया था। सूक्ष्म शिक्षण एक ऐसी शिक्षक प्रशिक्षण तकनीक है जिसमें छात्र-ध्यापकों (Teacher Trainees) को वास्तविक कक्षा शिक्षण की जटिलताओं से बचाने के लिए एक लघु आकार की कक्षा (5 से 10 छात्र) में थोड़े समय (5 से 10 मिनट) के लिए किसी एक शिक्षण कौशल (जैसे- प्रश्न पूछना, पुनर्बलन, श्यामपट्ट प्रयोग आदि) का अभ्यास कराया जाता है। इसमें 'प्रतिपुष्टि' (Feedback), 'पुनः योजना' (Re-plan), 'पुनः शिक्षण' (Re-teach) और 'पुनः प्रतिपुष्टि' (Re-feedback) का एक सुनियोजित चक्र होता है, जिससे शिक्षण कौशलों का विकास अत्यंत प्रभावी रूप से होता है। अत: विकल्प (b) इस प्रश्न का बिल्कुल सही उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- भारतीय संदर्भ: भारत में सूक्ष्म शिक्षण का सर्वप्रथम प्रयोग पायनियर के रूप में डी. डी. तिवारी (1967) ने किया था, जबकि बी.के. पासी (B.K. Passi) और एम.बी. बुच ने इस पर व्यापक कार्य किया।
- बी.के. पासी (विकल्प a): इन्होंने भारतीय शिक्षा के संदर्भ में सूक्ष्म शिक्षण के विभिन्न कौशलों को परिभाषित और वर्गीकृत किया है।
- बी.एफ. स्किनर (विकल्प c): यह 'क्रियाप्रसू अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) और अभिक्रमित अधिगम (Programmed Learning) के जनक हैं।
- जॉन डीवी (विकल्प d): यह 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) और 'करके सीखने' (Learning by Doing) के प्रमुख प्रतिपादक हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शिक्षण तकनीक और शिक्षक प्रशिक्षण में सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching) एक मील का पत्थर है जो रिफ्लेक्टिव प्रैक्टिस और व्यवहारवादी संशोधनों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए शिक्षण अधिगम प्रक्रिया और शिक्षाशास्त्र के अन्य सिद्धांतों को समझें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, DSSSB) में शिक्षण अधिगम तकनीकों, उनके जनकों और चक्र (Micro Teaching Cycle - सामान्यतः 36 मिनट का चक्र) से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। सूक्ष्म शिक्षण चक्र में योजना बनाना, शिक्षण, प्रतिपुष्टि, पुनः योजना, पुनः शिक्षण और पुनः प्रतिपुष्टि के चरणों का सही क्रम याद रखना अत्यंत आवश्यक है। यह तकनीक छात्र-शिक्षकों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और शिक्षण भय को दूर करने के लिए सर्वोच्च मानी जाती है।