शिक्षण में 'अभिप्रेरणा' (Motivation) का कौन सा प्रकार सबसे प्रभावी माना जाता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में 'अभिप्रेरणा' (Motivation) एक अत्यंत महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक कारक है जो शिक्षार्थियों को सीखने के लिए ऊर्जावान, निर्देशित और सतत रूप से सक्रिय रखता है। यहाँ 'आंतरिक प्रेरणा' (Intrinsic Motivation) को सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है क्योंकि यह विद्यार्थी के भीतर से उत्पन्न होती है। जब कोई बालक किसी कार्य को केवल इसलिए करता है क्योंकि उसे उस कार्य में आनंद आता है, जिज्ञासा शांत होती है या वह उस विषय में महारत हासिल करना चाहता है, तो यह आंतरिक प्रेरणा कहलाती है। इसके विपरीत बाह्य प्रेरणा, पुरस्कार, प्रशंसा या दंड पर आधारित होती है जिसका प्रभाव अल्पकालिक होता है। आंतरिक रूप से अभिप्रेरित छात्र गहरे रूप से सीखते हैं (Deep Learning) और लंबे समय तक ज्ञान को बनाए रखते हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation): यह आत्म-संतोष, जिज्ञासा और आंतरिक संतोष से जुड़ी होती है, जो दीर्घकालिक और सार्थक अधिगम सुनिश्चित करती है।
- बाह्य प्रेरणा (Extrinsic Motivation): इसमें अंक, ग्रेड, उपहार, या शिक्षक की प्रशंसा शामिल होती है जो तत्काल परिणाम दे सकती है लेकिन आत्म-प्रेरणा को कमजोर कर सकती है।
- दंड का डर और पुरस्कार की लालसा: ये दोनों बाह्य प्रेरणा के नकारात्मक और सतही रूप हैं, जो बच्चों में तनाव और अनैतिक व्यवहार को जन्म दे सकते हैं।
- विकल्प विश्लेषण: विकल्प (अ) सही है क्योंकि यह स्व-निर्देशित और स्थायी अधिगम को बढ़ावा देता है; जबकि ब, स, और द अल्पकालिक और बाह्य कारकों पर आधारित हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में अभिप्रेरणा का सिद्धांत आत्म-निर्णय सिद्धांत (Self-Determination Theory) और जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के साथ जुड़ा हुआ है, जो बालक की सक्रिय खोजबीन और आंतरिक जिज्ञासा पर बल देता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
टीईटी (TET) और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में अभिप्रेरणा से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। शिक्षकों को कक्षा कक्ष में ऐसी शिक्षण रणनीतियों का उपयोग करना चाहिए जो बच्चों में रटन विद्या के बजाय जिज्ञासा को जगाएं। जब शिक्षक विद्यार्थियों को自主ता (Autonomy) और सीखने में स्वतंत्रता देते हैं, तो उनकी आंतरिक प्रेरणा में वृद्धि होती है। पुरस्कार और दंड का अत्यधिक प्रयोग बच्चों की स्वाभाविक रुचि को मार सकता है, जिसे मनोविज्ञान में 'ओवरजस्टिफिकेशन इफेक्ट' (Overjustification Effect) कहा जाता है। इसलिए, एक कुशल शिक्षक हमेशा आंतरिक अभिप्रेरणा को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।