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स्वतंत्र भारत में प्रशासनिक सुधारों के इतिहास के संदर्भ में, वर्ष 2005 में गठित 'द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग' (Second Administrative Reform Commission - ARC) के अध्यक्ष और इसकी रिपोर्टों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस आयोग के प्रथम अध्यक्ष वीरप्पा मोइली (M. Veerappa Moily) थे, और उनके त्यागपत्र के बाद वी. रामचंद्रन को इस आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
- 2. इस आयोग ने अपनी रिपोर्टों में 'नैतिकता और प्रशासन' (Ethics in Governance) तथा 'नाच केंद्रित प्रशासन' (Citizen Centric Administration) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत संस्तुतियाँ दी थीं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2ARC) का गठन अगस्त 2005 में वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में किया गया था। जब वीरप्पा मोइली को वर्ष 2009 में केंद्रीय मंत्री बनाया गया, तब वी. रामचंद्रन नहीं बल्कि वी. रामचंद्रन के स्थान पर अन्य सदस्यों ने कार्य संभाला और बाद में रामचंद्रन अय्यंगार (V. Ramachandran) या अन्य नहीं बल्कि आयोग के कार्य को आगे बढ़ाया गया, किंतु प्रथम अध्यक्ष वीरप्पा मोइली थे और बाद में इसके अध्यक्ष वी. रामचंद्रन नहीं बल्कि खुद मोइली के बाद रामचंद्रन आयोग के अध्यक्ष नहीं बने थे (वास्तव में डॉ. कर्ण सिंह या अन्य इस प्रकार के बदलाव तथ्यात्मक रूप से अशुद्ध हैं; वी. रामचंद्रन इस आयोग के अध्यक्ष नहीं बने थे)। कथन 2 बिल्कुल सही है क्योंकि द्वितीय एआरसी ने कुल 15 रिपोर्टें प्रस्तुत की थीं, जिनमें 'Ethics in Governance' (चौथी रिपोर्ट) और 'Citizen Centric Administration' (बारहवीं रिपोर्ट) अत्यधिक प्रसिद्ध और प्रासंगिक हैं। अतः केवल कथन 2 सही है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) तथा 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' के विधिक एवं संस्थागत प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 5A के तहत स्थापित एक सांविधिक (Statutory) और शीर्ष सलाहकार निकाय है, जिसके अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं, तथा इसके उपाध्यक्ष केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री होते हैं।
2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार, देश के भीतर किसी भी राष्ट्रीय उद्यान (National Park) या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) की सीमाओं में परिवर्तन करने अथवा किसी संरक्षित क्षेत्र के 'कोर या बफर' जोनों में किसी भी प्रकार के वाणिज्यिक या औद्योगिक विकास कार्यों को अनुमति देने के लिए 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति' (Standing Committee of NBWL) की पूर्व अनुशंसा प्राप्त करना अनिवार्य है।
3. वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 के माध्यम से मूल अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत NBWL के सदस्यों की कुल संख्या को युक्तिसंगत बनाया गया है, और यह प्रावधान किया गया है कि अब NBWL की स्थायी समिति के निर्णयों या अनुशंसाओं को चुनौती देने के लिए किसी भी नागरिक को पहले 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) के समक्ष अपील दायर करनी होगी, और NBWL के अध्यक्ष की व्यक्तिगत अनुमति के बिना सीधे सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर नहीं की जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 75' के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति, मंत्रिपरिषद की संरचना और 'सामूहिक उत्तरदायित्व' (Collective Responsibility) के संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 75(1) के अनुसार, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, और इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति किसी ऐसे व्यक्ति को भी प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, बशर्ते उसे छह महीने के भीतर संसद के किसी एक सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी।
2. मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और यह सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत केवल नीतिगत निर्णयों पर लागू होता है, व्यक्तिगत विभागों के प्रशासनिक कार्यों पर नहीं।
3. '91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003' द्वारा अनुच्छेद 75 में खंड (1A) जोड़ा गया, जिसके तहत यह प्रावधान किया गया कि प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और किसी राज्य की मंत्रिपरिषद के मामले में भी यह सीमा विधानसभा की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, बशर्ते न्यूनतम संख्या की कोई पाबंदी नहीं है।
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