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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के दृष्टिकोण से बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत 'स्रवण बाधित बालकों' (Hearing Impaired Children) की शिक्षा में 'मौन पठन' (Silent Reading) की तुलना में 'ओष्ठ पठन' (Lip Reading/Speech Reading) का शिक्षण में क्या विशिष्ट महत्व है?
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Detailed Explanation
श्रवण बाधित बालकों (Hearing Impaired Children) के शिक्षण में 'ओष्ठ पठन' (Lip Reading) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधि है। इसके माध्यम से बालक वक्ता के होंठों की गति, चेहरे के हाव-भाव और श्वास के उतार-चढ़ाव को देखकर यह समझता है कि क्या कहा जा रहा है। यह विधि विशेष रूप से मौखिक भाषा को समझने, वैचारिक स्पष्टता लाने और समाज के अन्य लोगों के साथ प्रभावी संप्रेषण (Communication) स्थापित करने में सहायक होती है, जिससे उनका सामाजिक और भाषाई विकास सुगम हो जाता है।
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उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासतों के संदर्भ में, राज्य के किस जनपद में 'अछत्र' (Ahichchhatra) नामक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल स्थित है, जो प्राचीन काल में किस महाजनपद की राजधानी हुआ करता था?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके विशिष्ट लक्षणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) का पूर्ण गुण विकसित हो जाता है, जिसके कारण वे यह भली-भांति समझ लेते हैं कि किसी वस्तु के आकार, रूप या बर्तन बदलने पर भी उसकी मात्रा या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।
2. इस अवस्था के बालकों की सोच में 'अहंप्रतिबद्धता' (Egocentrism) पाई जाती है, जिसका अर्थ है कि बच्चा यह मानता है कि अन्य सभी लोग भी दुनिया को उसी दृष्टिकोण से देखते हैं, महसूस करते हैं और सोचते हैं जैसा कि वह स्वयं देखता है।
3. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर 'वर्गीकृत' (Classifying) करने, आरोही-अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने (Seriation) तथा 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता प्राप्त कर लेता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा एवं कृषि प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी और मध्यवर्ती बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ चिकनी और भारी काली मिट्टी जैसी होती हैं, जो सूखने पर अत्यंत कठोर हो जाती हैं और जिनमें नमी बनाए रखने (जल धारण क्षमता) की अद्भुत क्षमता होती है।
2. राज्य के पर्वतीय एवं पठारी ढलानों पर तथा विंध्यन क्षेत्र में पाई जाने वाली 'राँड़' (Randh) या 'परुवा' (Parwa) मृदा हल्की बलुई-दोमट प्रकार की होती है, जो कृषि की दृष्टि से कम उपजाऊ होती है और जिसमें सामान्यतः दलहनी फसलों की खेती की जाती है।
3. उत्तर प्रदेश के मैदानी भागों में प्रवाहित होने वाली नदियों द्वारा प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दौरान लाई जाने वाली नई जलोढ़ मृदा को 'खादर' कहा जाता है, जिसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता होती है, किंतु नाइट्रोजन एवं ह्यूमस की कमी पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और अधिगम अक्षमता (ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर - ASD)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, साइमन बैरन-कोहेन (Simon Baron-Cohen) द्वारा प्रतिपादित 'एम्पैथी-सिस्टमेटाइजिंग थ्योरी' (Empathy-Systematizing Theory) के अंतर्गत मस्तिष्क के 'मीडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (mPFC), 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्カス' (STS) और 'अमिगडाला' के बीच सामाजिक-संवेगात्मक अनुनाद, मानसिककरण (Mentalizing) और नियम-आधारित प्रणालीकरण की सक्रियण विसंगति, तथा उता फ्रिथ (Uta Frith) और फ्रान्सेस्का हाप्पे (Francesca Happé) द्वारा प्रतिपादित 'थ्योरी ऑफ माइंड (ToM) डेफिसिट मॉडल' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, संरचित दृश्य शिक्षाशास्त्र (Structured Visual Pedagogy -जैसे TEACCH फ्रेमवर्क) और विद्यार्थियों में सामाजिक-सञ्चार कौशल, अनुकूली व्यवहार व समग्र तार्किक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के आकलन (Assessment for Learning) और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पाल ब्लैक (Paul Black) और डेलन विलियम (Dylan Wiliam) द्वारा प्रतिपादित 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC) और 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN) के बीच मेटाकॉग्निटिव मॉनिटरिंग (Metacognitive Monitoring), त्रुटि प्रसंस्करण (Error Processing), और फीडबैक एकीकरण (Feedback Integration) की सक्रियण गतिकी, तथा कैरल ड्वेक (Carol Dweck) के 'विकासवादी मानसिकता' (Growth Mindset) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, फॉर्मेटिव-ड्रिवेन कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Formative-Driven Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में आत्म-नियमन (Self-Regulation), संज्ञानात्मक लचीलेपन व समग्र अधिगम क्षमता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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