एरिक एरिक्सन
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एरिक एरिक्सन (Erik Erikson) के मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, किशोरावस्था (Adolescence) के दौरान आने वाले संकट 'पहचान बनाम भूमिका भ्रम' (Identity vs. Role Confusion) के सफलतापूर्वक समाधान के परिणामस्वरूप किस विशिष्ट मनोसामाजिक शक्ति या गुण (Virtue) का विकास होता है?
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Detailed Explanation
एरिक एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत में, पाँचवा चरण 'किशोरावस्था' (लगभग 12 से 18 वर्ष) से संबंधित है, जिसमें मुख्य संकट 'पहचान बनाम भूमिका भ्रम' (Identity vs. Role Confusion) होता है। इस संकट का सफलतापूर्वक समाधान होने पर 'निष्ठा या वफादारी' (Fidelity) नामक गुण विकसित होता है, जो दूसरों के प्रति प्रतिबद्ध होने और अपने मूल्य प्रणाली को बनाए रखने की क्षमता को दर्शाता है। विकल्प (a) 'उद्देश्य' प्रारंभिक बाल्यावस्था (पहल बनाम अपराधबोध) से जुड़ा है, विकल्प (c) 'योग्यता' मध्य बाल्यावस्था (परिश्रम बनाम हीनता) से जुड़ा है, और विकल्प (d) 'देखभाल' वयस्क अवस्था (जनशीलता बनाम ठहराव) से जुड़ा है।
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'विकास के आयाम और अवस्थाएं' के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक एरिक एरिक्सन (Erik…
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एरिक्सन के सिद्धांत के अनुसार, बच्चा कपड़े पहनने, खिलौनों…
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एरिक एरिक्सन (Erik Erikson) के मनो-सामाजिक विकास के सिद्धांत (Psychosocial Development Theory) में व्यक्तित्व के विकास को जीवन भर की प्रक्रिया माना गया है। यदि कोई व्यक्तिशोध्य अवस्था (यौवनारंभ) से लेकर किशोरावस्था के दौरान अपने भीतर एक स्पष्ट आत्म-पहچان विकसित करने में असमर्थ रहता है और अपनी सामाजिक भूमिकाओं को लेकर भ्रमित रहता है, तो एरिक्सन के अनुसार वह मनो-सामाजिक संकट के किस विशिष्ट चरण का सामना कर रहा है और इसका परिणाम क्या हो सकता है?
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एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत किशोरावस्था से संबंधित अवस्था 'पहचान बनाम भूमिका संभ्रम' (Identity vs. Role Confusion) तथा प्रारंभिक वयस्कता से संबंधित अवस्था 'अंतरंगता बनाम अलगाव' (Intimacy vs. Isolation) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण व परामर्श प्रक्रियाओं में विद्यार्थियों के 'स्वयं की पहचान' (Self-Identity) के सुदृढ़ीकरण और सामाजिक समायोजन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पहचान बनाम भूमिका भ्रम' (Identity vs. Role Confusion) अवस्था के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं किशोरावस्था (Adolescence) के दौरान विद्यार्थियों में 'अहम् पहचान' (Ego Identity) के निर्माण, व्यावसायिक एवं वैचारिक अन्वेषण तथा समवयस्क समूह (Peer Group) के साथ घनिष्ठता के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादितशोधात्मक अवस्था—'पहचान बनाम भूमिका भ्रम' (Identity vs. Role Confusion) तथा इसके पूर्ववर्ती चरण 'उद्योग बनाम हीनता' (Industry vs. Inferiority)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में किशोरावस्था के दौरान विद्यार्थियों के आत्म-संकल्प (Self-Concept), व्यावसायिक अन्वेषण, और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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'विकास के मनोवैज्ञानिक और पारिस्थितिकीय सिद्धांतों' के संदर्भ में, यूरी ब्रॉन्फेनब्रेनर (Urie Bronfenbrenner) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय प्रणालियों के सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत 'माइक्रोसिस्टम' (Microsystem - तात्कालिक पर्यावरण जैसे परिवार और विद्यालय) और 'मेसोसिस्टम' (Mesosystem - विभिन्न माइक्रोसिस्टम्स के बीच अंतर्संबंध) के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक व सामाजिक स्वरूप, तथा एरिक एरिक्सन (Erik Erikson) द्वारा प्रतिपादित 'मनोसामाजिक विकास का सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत 'पहचान बनाम भूमिका भ्रांति' (Identity vs. Role Confusion) अवस्था के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सकारात्मक सहकर्मी संस्कृति के निर्माण और विद्यार्थियों में सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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