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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की रणनीतियाँ और संज्ञान' (Metacognition and Learning Strategies) के संदर्भ में, फ्रांसीसी दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक जॉन फ्लेवेल (John Flavell) द्वारा 1970 के दशक में प्रतिपादित 'मेटाकॉग्निटिव ज्ञान' (Metacognitive Knowledge) और 'मेटाकॉग्निटिव विनियमन' (Metacognitive Regulation) की अवधारणाओं के बीच के अंतर तथा कक्षा-कक्ष शिक्षण में इनके वैज्ञानिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के दृष्टिकोण से 'मेटाकॉग्निटिव' (अधिज्ञानात्मक) संकल्पना बहुत महत्वपूर्ण है। जॉन फ्लेवेल के अनुसार, मेटाकॉग्निशन का अर्थ 'ज्ञान के बारे में ज्ञान' या 'चिंतन के बारे में चिंतन' है। इसे मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है: 1. मेटाकॉग्निटिव ज्ञान (Metacognitive Knowledge): इसके अंतर्गत व्यक्ति को यह जानकारी होती है कि उसका अपना मस्तिष्क कैसे सीखता है, जिसमें व्यक्ति चर (Person variables), कार्य चर (Task variables), और रणनीति चर (Strategy variables) शामिल हैं। 2. मेटाकॉग्निटिव विनियमन (Metacognitive Regulation): यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा छात्र अपने सीखने की योजना बनाते हैं (Planning), अपनी समझ की निगरानी करते हैं (Monitoring), और अपने प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हैं (Evaluating)। विकल्प 'b' इस वैज्ञानिक अंतर को पूर्णतः स्पष्ट करता है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और डिस्लेक्सिया (Dyslexia - पठन वैकल्य)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, शेनाज डेंट (Shanaz D'Mello) और गैब्रिएल RE (Gabrieli) द्वारा विश्लेषित 'डिस्लेक्सिया' के अंतर्गत मस्तिष्क के 'वाच और स्पीच प्रोसेसिंग से जुड़े बाएं गोलार्ध के पेरियाक्वाडक्युटल ग्रे (PAG)' और 'टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन (TPJ)' तथा दृश्य शब्द रूप क्षेत्र (Visual Word Form Area - VWFA) के बीच 'फोनोलॉजिकल अवेयरनेस' (Phonological Awareness), ऑर्थोग्राफिक मैपिंग (Orthographic Mapping) और श्रवण-दृश्य एकीकरण की सक्रियण विसंगति, तथा स्टैनिस्लास डीहेन (Stanislas Dehaene) द्वारा प्रतिपादित 'न्यूरोनल रिसाइक्लिंग हाइपोथेसिस' (Neuronal Recycling Hypothesis) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, बहुसंवेदी ऑर्टन-गिलिंगहम शिक्षाशास्त्र (Orton-Gillingham Multisensory Pedagogy) और विद्यार्थियों में ध्वन्यात्मक संवेदनशीलता, शब्द-पहचान व पठन प्रवाह (Reading Fluency) के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'संरक्षण और वर्गीकरण की क्षमता' के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), 'इन्फीरियर पैरिएटल लोब्यूल' (Inferior Parietal Lobule) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' के बीच स्थानिक प्रसंस्करण, तार्किक व्युत्क्रमणीयता (Reversibility) और मानसिक संचालन की सक्रियण गतिकी, तथा ब्रूनर (Jerome Bruner) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक प्रतिनिधित्व के तीन स्तर' (प्रतीकात्मक, आइकॉनिक और एनएक्टिव) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, ठोस वस्तु आधारित संक्रियात्मक शिक्षाशास्त्र (Concrete-Operational Pedagogy) और विद्यार्थियों में संरक्षण बोध, विकेंद्रीकरण व समग्र तार्किक कौशल के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) और प्रमुख फसलों के वितरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश को कुल 9 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो राज्य के विभिन्न हिस्सों में वर्षा, तापमान और मिट्टी की भिन्नता को दर्शाते हैं। 2. 'राड़' (Raad) और 'परवा' (Parwa) मृदा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के तराई और भाबर क्षेत्रों में पाई जाने वाली अत्यधिक उपजाऊ जलोढ़ मिट्टियाँ हैं, जो गन्ने की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं। 3. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ चिकनी, काले रंग की और नमी धारण करने की उच्च क्षमता वाली होती हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'कपास मृदा' या भारी मृदा भी कहा जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) की निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख विशेषताएँ हैं? 1. 'जीववाद' (Animism) की प्रवृत्ति, जिसके अंतर्गत बच्चा निर्जीव वस्तुओं (जैसे खिलौने, गुड़िया या पत्थर) को सजीव मानता है और यह सोचता है कि वे भी महसूस कर सकती हैं, बोल सकती हैं या जीवित हैं। 2. 'अहंप्रतिपत्ति / अहंप्रेंद्रीकरण' (Egocentrism), जिसके कारण बच्चा यह मान लेता है कि दूसरे व्यक्ति उसके अपने दृष्टिकोण, विचारों और अनुभवों को ही देख रहे हैं और दुनिया को ठीक वैसे ही अनुभव करते हैं जैसे वह करता है। 3. 'संरक्षण' (Conservation) और 'पलटावी' (Reversibility) की क्षमता का पूर्ण विकास, जिससे बच्चा यह समझ जाता है कि किसी वस्तु का आकार बदलने पर उसकी मात्रा अपरिवर्तित रहती है और किसी प्रक्रिया को उल्टी दिशा में भी सोचा जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, मृदा प्रकार और जलवायुिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसके अंतर्गत ललितपुर, झाँसी, महोबा, बाँदा और सोनभद्र जिले आते हैं। इस क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' और 'काबर' मृदाएँ चिकनी और काली प्रकृति की होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की अत्यधिक क्षमता होती है। 2. 'भावर' क्षेत्र कंकड़, पत्थरों और मोटे बालू से निर्मित एक ऐसा संकीर्ण पेटी क्षेत्र है जहाँ नदियाँ सतह पर बहने के बजाय अक्सर विलुप्त (अदृश्य) हो जाती हैं और केवल दलदली व वनाच्छादित तराई क्षेत्र में पुनः प्रकट होती हैं। 3. उत्तर प्रदेश में होने वाली कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 75% से 80% भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी की शाखा से प्राप्त होता है, जबकि शीतकाल में होने वाली कुछ वर्षा 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) के कारण होती है जिसे रबी की फसल के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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