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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और डिस्लेक्सिया (Dyslexia - पठन वैकल्य)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, शेनाज डेंट (Shanaz D'Mello) और गैब्रिएल RE (Gabrieli) द्वारा विश्लेषित 'डिस्लेक्सिया' के अंतर्गत मस्तिष्क के 'वाच और स्पीच प्रोसेसिंग से जुड़े बाएं गोलार्ध के पेरियाक्वाडक्युटल ग्रे (PAG)' और 'टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन (TPJ)' तथा दृश्य शब्द रूप क्षेत्र (Visual Word Form Area - VWFA) के बीच 'फोनोलॉजिकल अवेयरनेस' (Phonological Awareness), ऑर्थोग्राफिक मैपिंग (Orthographic Mapping) और श्रवण-दृश्य एकीकरण की सक्रियण विसंगति, तथा स्टैनिस्लास डीहेन (Stanislas Dehaene) द्वारा प्रतिपादित 'न्यूरोनल रिसाइक्लिंग हाइपोथेसिस' (Neuronal Recycling Hypothesis) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, बहुसंवेदी ऑर्टन-गिलिंगहम शिक्षाशास्त्र (Orton-Gillingham Multisensory Pedagogy) और विद्यार्थियों में ध्वन्यात्मक संवेदनशीलता, शब्द-पहचान व पठन प्रवाह (Reading Fluency) के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

व्याख्या: डिस्लेक्सिया (Dyslexia) एक विशिष्ट पठन अक्षमता है जो मस्तिष्क के बाएं गोलार्ध के टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन (TPJ) और दृश्य शब्द रूप क्षेत्र (VWFA) में ध्वन्यात्मक (phonological) प्रसंस्करण की कमी के कारण होती है। स्टैनिस्लास डीहेन के 'न्यूरोनल रिसाइक्लिंग हाइपोथेसिस' के अनुसार, पठन मस्तिष्क की एक पुनर्चक्रित क्षमता है। समावेशी कक्षाओं में ऑर्टन-गिलिंगहम (Orton-Gillingham) जैसी बहुसंवेदी शिक्षण पद्धतियाँ (श्रवण, दृश्य, और किनेस्थेटिक स्पर्श) बच्चों में ऑर्थोग्राफिक मैपिंग और फोनोलॉजिकल अवेयरनेस को बेहतर बनाकर पठन प्रवाह को बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी होती हैं। अतः विकल्प (A) सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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