जीन पियाजे
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'विकास के आयामों और उनके अंतर्संबंधों' के संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत चार प्रमुख अवस्थाओं—'संवेदी-गामक अवस्था' (Sensorimotor Stage), 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage), 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage), और 'औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage)—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) द्वारा प्रतिपादित 'मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत' (Psychosexual Development Theory) की पाँच अवस्थाओं—'मौखिक' (Oral), 'गुदा' (Anal), 'लैंगिक' (Phallic), 'सुषुप्ति' (Latency), और 'जननांग' (Genital)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत बच्चों की मानसिक संरचनाओं और बौद्धिक क्षमताओं के विकास की व्याख्या करता है, जबकि सिगमंड फ्रायड का मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत व्यक्तित्व और जैविक ऊर्जा (लिबिडो) के विकास को रेखांकित करता है। पियाजे की 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (7-11 वर्ष) और फ्रायड की 'सुषुप्ति अवस्था' (Latency Stage, लगभग 6 वर्ष से यौवनारंभ तक) समकालिक (concurrent) आयु वर्ग से जुड़ी हैं। इस अवधि में बच्चे अपनी बौद्धिक ऊर्जा (तार्किक चिंतन और स्कूल आधारित अधिगम) तथा सामाजिक/सहकर्मी संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जहाँ फ्रायड के अनुसार यौन ऊर्जा सुषुप्त हो जाती है और पियाजे के अनुसार बच्चा तार्किक रूप से विकेंद्रीकृत (decentered) होने लगता है। अतः विकल्प (A) दोनों सिद्धांतों के विकासात्मक अंतर्संबंधों को सर्वाधिक सटीकता से स्पष्ट करता है।
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