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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'भाषा अर्जन और संज्ञानात्मक विकास के बीच अंतर्संबंधों' के संदर्भ में, नोम चोमस्की (Noom Chomsky) द्वारा प्रतिपादित 'भाषा अर्जन यंत्र' (Language Acquisition Device - LAD) और 'सार्वभौमिक व्याकरण' (Universal Grammar) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ब्रोका क्षेत्र' (Broca's Area) और 'वेर्निके क्षेत्र' (Wernicke's Area) की आनुवंशिक रूप से निर्धारित वाक्य-संरचनात्मक सक्रियण प्रक्रिया, तथा बेंजामिन ली व्होर्फ़ (Benjamin Lee Whorf) और एडवर्ड सेपिर (Edward Sapir) द्वारा प्रतिपादित 'भाषिक सापेक्षता परिकल्पना' (Linguistic Relativity Hypothesis / Sapir-Whorf Hypothesis) के अंतर्गत 'भाषा विचारों को निर्धारित करती है' के सशक्त संस्करण के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, बहुभाषी वातावरण (Multilingual Classroom) के प्रबंधन और विद्यार्थियों में स्वदेशी भाषा संप्रेषण एवं संज्ञानात्मक लचीलेपन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
नोम चोमस्की का 'सार्वभौमिक व्याकरण' और 'भाषा अर्जन यंत्र' (LAD) यह मानता है कि मनुष्यों में भाषा सीखने की क्षमता जन्मजात होती है और इसका जैविक आधार मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे ब्रोका और वेर्निके क्षेत्र) में निहित है। इसके विपरीत, सेपिर-व्होर्फ़ की 'भाषिक सापेक्षता परिकल्पना' यह तर्क देती है कि हम जिस भाषा का उपयोग करते हैं, वह हमारे सोचने के तरीके और दुनिया को देखने के दृष्टिकोण को प्रभावित या निर्धारित करती है। आधुनिक समावेशी और बहुभाषी कक्षा-कक्षों में इन दोनों सिद्धांतों को समझना शिक्षकों को यह जानने में मदद करता है कि बच्चे जैविक रूप से भाषा सीखने के लिए तैयार होते हैं, जबकि उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक भाषा उनके संज्ञानात्मक और वैचारिक संसार को विशिष्ट आकार प्रदान करती है।
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