जीन पियाजे के अनुसार, किस अवस्था में बच्चा 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) की समझ विकसित कर लेता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) का गुण बच्चे में 'संवेदी-पेशीय अवस्था' (Sensorimotor Stage, जन्म से 2 वर्ष) के दौरान विकसित होता है। वस्तु स्थायित्व का तात्पर्य इस समझ से है कि वस्तुएं तब भी अस्तित्व में रहती हैं जब उन्हें देखा, सुना या छुआ न जा सके। इस अवस्था के शुरुआती महीनों में, बच्चा 'आंख ओझल, पहाड़ ओझल' की स्थिति में रहता है, लेकिन जैसे-जैसे इस अवस्था के अंत तक (लगभग 18 से 24 महीने की आयु में) मानसिक प्रतिनिधित्व (Mental Representation) विकसित होता है, बच्चा समझ जाता है कि चीजें अदृश्य होने पर भी नष्ट नहीं हुई हैं। यह बाल विकास और बाल मनोविज्ञान में एक मील का पत्थर माना जाता है जो बच्चों की स्मृति और स्थानिक समझ को दर्शाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- संवेदी-पेशीय अवस्था पियाजे के सिद्धांत की पहली अवस्था है जो जन्म से 2 वर्ष तक चलती है।
- इस चरण की अन्य प्रमुख विशेषताएं लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार और भिन्नमितीय अनुकरण हैं।
- विकल्प (b) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष) भाषा विकास और प्रतीकात्मक विचार से जुड़ी है।
- विकल्प (c) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) तार्किक चिंतन और संरक्षण (Conservation) की क्षमता प्रदान करती है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे ने बच्चों के मानसिक विकास को चार चरणों में बांटा है। वस्तु स्थायित्व संवेदी-पेशीय बुद्धि का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। अधिक जानकारी के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, REET) में पियाजे के चरणों से बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। 'वस्तु स्थायित्व' से जुड़े प्रश्न अक्सर व्यावहारिक उदाहरणों के साथ आते हैं, जैसे- यदि किसी खिलौने को चादर के नीचे छुपाने पर भी बच्चा उसे ढूंढने का प्रयास करता है, तो यह वस्तु स्थायित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है। अध्यापकों को यह समझना चाहिए कि इन्फेंट्री स्टेज में बच्चों की यह समझ उनके पर्यावरण के साथ सक्रिय अन्वेषण (Active Exploration) और संवेदी अनुभवों के माध्यम से मजबूत होती है। इसलिए, कक्षाओं में खिलौनों और संवेदी सामग्रियों का उपयोग बच्चों के संज्ञानात्मक विकास को गति प्रदान करता है।