बुद्धि का 'त्रि-तंत्रीय सिद्धांत' (Triarchic Theory) किसके द्वारा दिया गया था?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि का 'त्रि-तंत्रीय सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence) प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) द्वारा वर्ष 1985 में प्रतिपादित किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, बुद्धि यह दर्शाती है कि व्यक्ति अपने पर्यावरण के साथ किस प्रकार अंतःक्रिया करता है। स्टर्नबर्ग ने बुद्धि के तीन मुख्य उप-सिद्धांत या घटक बताए हैं: (1) घटकीय या विश्लेषणात्मक बुद्धि (Componential/Analytical Intelligence) जिसके तहत समस्या समाधान, तार्किक चिंतन और विश्लेषणात्मक क्षमता आती है; (2) अनुभवात्मक या रचनात्मक बुद्धि (Experiential/Creative Intelligence) जो नए अनुभवों से सीखने और सृजनात्मकता से जुड़ी है; और (3) संदभात्मक या व्यावहारिक बुद्धि (Contextual/Practical Intelligence) जिसे प्रायः 'व्यावहारिक ज्ञान' या 'स्ट्रीट स्मार्टनेस' कहा जाता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालता है। यहाँ विकल्प 'a' पूरी तरह सही है क्योंकि रॉबर्ट स्टर्नबर्ग ने ही इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। अन्य विकल्प जैसे हावर्ड गार्डनर ने बहुबुद्धि सिद्धांत दिया, अल्फ्रेड बिने ने पहला बुद्धि परीक्षण बनाया और स्पीयरमैन ने द्विकारक सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- रॉबर्ट स्टर्नबर्ग: इन्होंने त्रि-तंत्रीय सिद्धांत दिया जिसमें विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि शामिल है।
- हावर्ड गार्डनर (विकल्प b): इन्होंने 'बहुबुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) प्रतिपादित किया, जिसमें 8 से 9 प्रकार की स्वतंत्र बुद्धियों का वर्णन किया गया है।
- अल्फ्रेड बिने (विकल्प c): इन्हें आधुनिक बुद्धि परीक्षण का जनक माना जाता है और इन्होंने 1905 में पहला सफल बुद्धि परीक्षण विकसित किया था।
- चार्ल्स स्पीयरमैन (विकल्प d): इन्होंने बुद्धि का 'द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) दिया, जिसमें 'g' कारक (सामान्य बुद्धि) और 's' कारक (विशिष्ट बुद्धि) शामिल हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) में बुद्धि के विभिन्न सिद्धांत परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। स्टर्नबर्ग का त्रि-तंत्रीय सिद्धांत सूचना प्रक्रमण उपागम (Information Processing Approach) पर आधारित है, जो यह समझाता है कि मस्तिष्क किस प्रकार सूचनाओं को ग्रहण करता है, विश्लेषित करता है और उसका उपयोग करता है। अधिक जानकारी के लिए बुद्धि के सिद्धांत और जीन पियाजे का सिद्धांत जैसे विषयों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET, और MPTET) में बुद्धि के सिद्धांतों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को अक्सर स्टर्नबर्ग के 'त्रि-तंत्रीय सिद्धांत' और गार्डनर के 'बहुबुद्धि सिद्धांत' के बीच भ्रम हो जाता है। याद रखें कि गार्डनर बहुतायत वाली क्षमताओं की बात करते हैं जबकि स्टर्नबर्ग मानसिक प्रसंस्करण के तीन बड़े आयामों (विश्लेषणात्मक, सृजनात्मक, व्यावहारिक) को रेखांकित करते हैं। कक्षा शिक्षण में व्यावहारिक बुद्धि (Contextual Intelligence) का उपयोग करके शिक्षक विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं से जोड़ सकते हैं, जो समावेशी शिक्षा और बाल-केंद्रित शिक्षा प्रणाली की मुख्य आवश्यकता है। प्रश्नों को हल करते समय वैज्ञानिकों के नाम और उनके द्वारा दिए गए विशिष्ट शब्दों (Keywords) का मिलان करना सबसे सटीक रणनीति है।