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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और डिस्लेक्सिया (Dyslexia - पठन वैकल्य)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, स्तानिस्लास दहाने (Stanislas Dehaene) और आधुनिक न्यूरोसाइंस के 'फोनोलॉजिकल-विजुअल डिसकनेक्टिविटी मॉडल' (Phonological-Visual Disconnectivity Model) के अंतर्गत मस्तिष्क के 'वेंट्रल विजुअल वर्ड फॉर्म एरिया' (VWFA: बाएं ऑक्सिपिटोटैम्पोरल जंक्शन), 'सुपीरियर टेम्पोरल गाइरस' (STG: वर्निक क्षेत्र का हिस्सा) और 'आर्कुएट फेसिकुलस' (Arcuate Fasciculus) के बीच दृश्य-श्रवण एकीकरण, ग्राफेम-फोनेम मैपिंग (Grapheme-Phoneme Mapping) और शब्द-अर्थ प्रसंस्करण की सक्रियण विसंगति, तथा मारिया वूल्फ (Maryanne Wolf) और पैट्रिशिया बोवर्स (Patricia Bowers) द्वारा प्रतिपादित 'डबल-डिफ़िसिट हाइपोथेसिस' (Double-Deficit Hypothesis: नामकरण गति और फोनोलॉजिकल जागरूकता दोनों की कमी) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, फोनोलॉजिकल-आधारित मल्टीसेंसरी स्ट्रक्चर्ड लिटरेसी अप्रोच (Orton-Gillingham Based Multisensory Approach) और विद्यार्थियों में पठन प्रवाह, वर्तनी सटीकता व समग्र साक्षरता दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: डिस्लेक्सिया (पठन वैकल्य) एक न्यूरो-डेवलपमेंटल विकार है जो मुख्य रूप से मस्तिष्क के 'विजुअल वर्ड फॉर्म एरिया' (VWFA) और श्रवण-वाक् प्रसंस्करण क्षेत्रों (जैसे सुपीरियर टेम्पोरल गाइरस और आर्कुएट फेसिकुलस) के बीच दृश्य-श्रवण एकीकरण (Grapheme-Phoneme Mapping) की विसंगति से जुड़ा होता है। मारिया वूल्फ का 'डबल-डिफ़िसिट हाइपोथेसिस' यह बताता है कि बच्चों में फोनोलॉजिकल जागरूकता की कमी और रैपिड ऑटोमैटिक नेमिग (RAN) की कमजोरी दोनों मिलकर पठन की गंभीर कठिनाई पैदा करते हैं। समावेशी कक्षाओं में 'ऑर्टन-गिलिंघम' जैसी मल्टीसेंसरी स्ट्रक्चर्ड लिटरेसी पद्धतियों का उपयोग इन तंत्रिका मार्गों को मजबूत करने और पठन प्रवाह को सुधारने में अत्यधिक प्रभावी होता है।
Related Questions
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'वर्णमाला' और 'ध्वनियों के वर्गीकरण' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिंदी वर्णमाला में कुल 52 मूल वर्ण माने जाते हैं, जिनमें 11 स्वर, 2 अयोगवाह (अनुस्वार और विसर्ग), 25 स्पर्श व्यंजन, 4 अंतःस्थ व्यंजन, 4 ऊष्म/संघर्षी व्यंजन, 4 संयुक्त व्यंजन और 2 द्विगुत/उक्षिप्त व्यंजन (ड, ढ) शामिल हैं।
2. प्रयत्न और वायु की मात्रा के आधार पर व्यंजनों का वर्गीकरण करते समय 'महाप्राण' ध्वनियों के उच्चारण में मुख से अधिक वायु निकलती है, और प्रत्येक वर्ग (क, च, ट, त, प) का दूसरा और चौथा वर्ण तथा सभी ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) महाप्राण ध्वनियाँ कहलाते हैं।
3. 'र' वर्ण को 'लुंठित' (कंपित) व्यंजन कहा जाता है, क्योंकि इसके उच्चारण में जीभ की नोक मसूड़े को छूती है और हवा जीभ के बगल से निकलती है, जिसके कारण 'ल' को 'पार्श्वेिक' (Lateral) व्यंजन की श्रेणी में रखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के संदर्भ में, न्यूरोलॉजिकल और विकासात्मक विकारों जैसे—'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia), 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia), 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia), और 'डिप्रैक्सिया' (Dyspraxia)—के वैज्ञानिक स्वरूप, उनके विशिष्ट लक्षणों तथा कक्षा-कक्षीय पहचान और उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा और अधिगम' (Motivation and Learning) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs: शारीरिक सुरक्षा से लेकर आत्म-सिद्धि तक) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रलग्रुप स्ट्रेटम' (Ventral Striatum), 'एंटिरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation), होमियोस्टैटिक नियमन, और दीर्घकालिक लक्ष्य-निर्धारण की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डेसी और रिचर्ड रायन (Deci & Ryan) के 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory: स्वायत्तता, सक्षमता और संबद्धता) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मोटिवेशन ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Motivation Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-नियामक अधिगम, भावनात्मक सुरक्षा व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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हिंदी भाषा शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया में 'उपचारात्मक शिक्षण' (Remedial Teaching) का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की अधिगम संबंधी कठिनाइयों और त्रुटियों को दूर करना है। इस संदर्भ में, उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया का सबसे पहला और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक चरण निम्नलिखित में से कौन सा माना जाता है?
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प्राचीन भारतीय दर्शन प्रणालियों, उनके संस्थापकों (प्रणेताओं) और उनके मूलभूत सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर मीमांसा (वेदांत दर्शन) के प्रणेता महर्षि बादरायण हैं, जो यह प्रतिपादित करते हैं कि ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है (ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या) और जीव तथा ब्रह्म में कोई मूलभूत भेद नहीं है।
2. योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि हैं, जो चित्त की वृत्तियों के निरोध को योग मानते हैं और इसके अंतर्गत अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि) का मार्ग सुझाते हैं।
3. वैशेषिक दर्शन के प्रणेता महर्षि जैमिनी हैं, जो इस ब्रह्मांड की रचना 'अदृष्ट' और कर्मकांडीय यज्ञों की अनिवार्यता के आधार पर समझाते हैं तथा वेदों के कर्मकांड खंड को ही परम सत्य मानते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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