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संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार (Constitutional Advisor) कौन थे?

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बी.एन. राव (B.N. Rau) संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे।
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Related Questions

→ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति, पदावधि, निष्कासन तथा आयोग की स्वायत्तता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और दोनों के मामलों में यह संवैधानिक अनिवार्यता है कि आयोग के आधे सदस्यों के पास केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष का प्रशासनिक अनुभव होना चाहिए। 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत संघ या राज्य लोक सेवा आयोग के किसी अध्यक्ष या सदस्य को केवल राष्ट्रपति द्वारा ही साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकता है, भले ही वह राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य या अध्यक्ष क्यों न हो, और इस प्रक्रिया में उच्चतम न्यायालय द्वारा जाँच किए जाने का प्रावधान अनिवार्य किया गया है। 3. संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने पद की अवधि समाप्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद को ग्रहण करने के लिए पूर्णतः अपात्र (Ineligible) होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति पर संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने के लिए पात्र होता है, किंतु वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री की नियुक्ति से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के विश्रामकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित ऐसा प्रत्येक अध्यादेश राज्य विधानमंडल के पुनर्समवेत होने के छह सप्ताह के भीतर विधानमंडल द्वारा अनुमोदित होना अनिवार्य है, अन्यथा यह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, बशर्ते इसे राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखने पर राष्ट्रपति की अनुमति मिल जाए। 2. राज्यपाल की अध्यादेश निर्माण की शक्ति उसकी स्वविवेकिय (Discretionary) शक्ति नहीं है, बल्कि वह इस शक्ति का प्रयोग राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कर सकता है, सिवाय उस स्थिति के जब कोई अध्यादेश राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखा जाना हो। 3. अनुच्छेद 164 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातियों के कल्याण के लिए एक पृथक मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए राज्यपाल विशेष निर्देश दे सकता है। 4. राज्यपाल को यह संवैधानिक अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी भी साधारण विधेयक को अनिश्चितकाल के लिए अपने पास रोक सकता है (Pocket Veto), क्योंकि संविधान में राज्यपाल के लिए विधेयक पर अनुमति देने या रोकने हेतु कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है, और इस संबंध में उच्चतम न्यायालय ने 'शमशेर सिंह वाद' में स्पष्ट किया है कि राज्यपाल हर मामले में मंत्रिपरिषद की सलाह से ही कार्य करने के लिए बाध्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में निहित समाजवादी सिद्धांतों के क्रियान्वयन के लिए बनाए गए कानूनों को इस आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता कि वे अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, बशर्ते कि ऐसा कानून नीति निर्देशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाया गया हो (यह संरक्षण मूल रूप से 25वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था)। 2. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और देश की विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, तथापि इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं ठहराया गया है, जिसका अर्थ है कि इनके हनन पर सीधे उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की जा सकती है। 3. स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिश पर ही भारतीय संविधान में भाग IV-A के अंतर्गत मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया था, और इस समिति ने ही यह संस्तुति की थी कि नीति निर्देशक तत्वों को मूल अधिकारों पर सर्वोच्चता प्रदान की जानी चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की विधायी शक्तियों, धन विधेयकों की प्रक्रिया तथा विधान परिषद के गठन एवं उत्सादन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का संकल्प कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे, और ऐसा संकल्प संसद के लिए कानून बनाने हेतु पूर्ण रूप से बाध्यकारी होता है। 2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवाद स्वरूप जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के समय इसके विशेष प्रावधान थे)। 3. धन विधेयक (Money Bill) केवल राज्य की विधानसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं; तथा विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद को भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों, उनकी प्रकृति तथा उनके संवैधानिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के भाग IV-A के अनुच्छेद 51A के तहत जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत प्रारंभ में 10 मूल कर्तव्य थे। 2. ये मूल कर्तव्य प्रकृति से न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात यदि कोई नागरिक इनका उल्लंघन करता है, तो संसद या राज्य विधानमंडल इन्हें लागू करने के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय के माध्यम से संवैधानिक और कानूनी दंड का प्रावधान कर सकती है। 3. वर्ष 2002 में पारित 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से ग्यारहवें मूल कर्तव्य को जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य उस माता-पिता या संरक्षक का होगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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