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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अवधि-पारिस्थितिकीय विकास सिद्धांत (Bioecological Systems Theory)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, यूरी ब्रोंफेनब्रेनर (Urie Bronfenbrenner) द्वारा प्रतिपादित पाँच पर्यावरणीय स्तरों — यथा माइक्रोसिस्टम (Microsystem), मेसोसिस्टम (Mesosystem), एक्सोसिस्टम (Exosystem), मैक्रोसिस्टम (Macrosystem), और क्रोनोसिस्टम (Chronosystem) — के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), 'लिम्बिक सिस्टम' (Limbic System), और 'सोशल ब्रेन नेटवर्क' (Social Brain Network) के बीच पारिस्थितिकीय तनाव नियमन, पर्यावरणीय अनुकूलन (Environmental Adaptation), और सामाजिक-संवेगात्मक सम-नियंत्रण (Socio-emotional Regulation) की सक्रियण गतिकी, तथा लेव वाइगोत्स्की के 'सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'इको-कॉग्निटिव इंक्लूसिव पेडागोजी' (Eco-Cognitive Inclusive Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहु-आयामी सामाजिक विकास, पर्यावरणीय सुरक्षा व समग्र संज्ञानात्मक लचीलेपन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

यूरी ब्रोंफेनब्रेनर का 'अवधि-पारिस्थितिकीय विकास सिद्धांत' यह स्पष्ट करता है कि बालक का विकास केवल उसके आंतरिक गुणों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उसके आस-पास के विभिन्न पर्यावरणीय स्तरों (माइक्रो, मेसो, एक्सो, मैक्रो और क्रोनोसिस्टम) के साथ उसकी निरंतर अंतःक्रिया पर निर्भर करता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, यह पर्यावरण बालक के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और सोशल ब्रेन नेटवर्क को प्रभावित करता है, जिससे उसका सामाजिक-संवेगात्मक नियमन और संज्ञानात्मक विकास होता है। प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में इस सिद्धांत का अनुप्रयोग शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि बच्चों की पृष्ठभूमि, परिवार, विद्यालय और समाज उनके अधिगम और समग्र कल्याण को कैसे आकार देते हैं।
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सी अवस्था 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking), 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'व्यवस्थित समस्या समाधान' की क्षमता के विकास को सबसे सटीक रूप से प्रदर्शित करती है? पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में ऊर्जा के प्रवाह और जैव-रासायनिक चक्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा 'एकदिशीय' (Unidirectional) होता है, जिसमें सूर्य से प्राप्त सौर ऊर्जा का केवल 1 प्रतिशत भाग ही हरे पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है (लिंडेमैन का 10 प्रतिशत नियम ऊर्जा के हस्तांतरण को दर्शाता है)। 2. 'जैव-भू-रासायनिक चक्र' (Biogeochemical Cycles) के अंतर्गत पोषक तत्वों का चक्रीकरण होता है, जिसमें 'अवसादी चक्र' (Sedimentary Cycle) के प्रमुख उदाहरण नाइट्रोजन चक्र और कार्बन चक्र हैं, जबकि 'गैसीय चक्र' (Gaseous Cycle) के अंतर्गत फास्फोरस और गंधक (Sulfur) चक्र आते हैं। 3. पारिस्थितिक पिरामिडों में, तालाब के पारिस्थितिकी तंत्र का 'जीवभार का पिरामिड' (Pyramid of Biomass) सामान्यतः 'उल्टा' (Inverted) बनता है, क्योंकि इसमें प्राथमिक उत्पादकों (पादपप्लवक) का कुल भार उच्च पोषण स्तर के उपभोक्ताओं (मछलियों) की तुलना में बहुत कम होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'पर्यावरण अध्ययन' (EVS) के अंतर्गत 'पर्यावरणीय प्रदूषण और उनके प्रभाव' के संदर्भ में, वायु प्रदूषण के प्रमुख प्राथमिक और द्वितीयक प्रदूषकों (Primary and Secondary Pollutants)—जैसे सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), ओजोन (O3), और परॉक्सीएसिटाइल नाइट्रेट (PAN)—के निर्माण स्रोतों, उनकी रासायनिक अंतःक्रियाओं, और उनके मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के वैज्ञानिक एवं तार्किक विश्लेषण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के मार्गदर्शक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन पर्यावरण अध्ययन के पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र के संबंध में सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बालकों को, चाहे उनकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, बिना किसी भेदभाव के समान शिक्षण अधिगम अवसर प्रदान करना है। 2. यह प्रणाली विशेष बालकों (दिव्यांगों) के लिए केवल पृथक् (Segregated) विशेष विद्यालयों की स्थापना पर जोर देती है ताकि उनका विशेष शिक्षकों द्वारा अलग से विकास किया जा सके। 3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act - 2009) दोनों ही देश में समावेशी शिक्षा प्रणाली के सशक्त क्रियान्वयन की वकालत करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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