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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत' (Insight Learning Theory) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मैक्स वर्दइमर (Max Wertheimer), वोल्फगैंग कोहलर (Wolfgang Köhler) और कुर्त कोफ्का (Kurt Koffka) द्वारा प्रतिपादित 'गेस्टाल्ट मनोविज्ञान' (Gestalt Psychology: समग्रता का नियम, पुनर्गठन और 'आहा! अनुभव') के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'लैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Lateral Prefrontal Cortex), 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC), और 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) के बीच क्षणिक न्यूरोनल पुनर्गठन (Transient Neuronal Reorganization), संज्ञानात्मक छलांग (Cognitive Leap), और अवचेतन समस्या-समाधान की सक्रियण गतिकी, तथा जॉन डीवी (John Dewey) के 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'गेस्टाल्ट-बेस्ड इनसाइट पेडागोजी' (Gestalt-Based Insight Pedagogy) और विद्यार्थियों में समग्रतावादी दृष्टिकोण, तार्किक अंतर्दृष्टि व समग्र समस्या-समाधान कौशल के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: कोहलर का 'सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत' (Gestalt Insight Learning) इस बात पर जोर देता है कि समस्या का समाधान किसी क्रमिक प्रयास से नहीं, बल्कि अचानक (Aha! Experience) मस्तिष्क द्वारा स्थिति के विभिन्न घटकों के समग्र पुनर्गठन (Reorganization) से होता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, इसमें 'लैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (योजना और संज्ञानात्मक नियंत्रण के लिए), 'हिप्पोकैम्पस' (स्मृति के पुनरुद्धार के लिए), और 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (द्वंद्व समाधान के लिए) की सक्रिय भागीदारी होती है। यह आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में विद्यार्थियों को रटने के बजाय समस्याओं को समग्र रूप से देखने और तार्किक अंतर्दृष्टि विकसित करने में मदद करता है।
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में 'प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन के पाठ्यक्रम' को कितने प्रमुख 'थीम्स' (Themes) या विषयों के अंतर्गत विभाजित किया गया है, और निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प उन मुख्य थीम्स में शामिल है?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) शिक्षण और पर्यावरण संरक्षण आंदोलनों के संदर्भ में, वर्ष 1973 में उत्तराखंड के चमोली जिले से शुरू हुए प्रसिद्ध 'चिपको आंदोलन' (Chipko Movement) के मुख्य प्रेरणास्त्रोत और सुंदरलाल बहुगुणा के साथ इस आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़े पर्यावरणविद् कौन थे, जिन्होंने पेड़ों से चिपककर उनकी रक्षा करने का आह्वान किया था?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन तथा इसकी जलवायु एवं मिट्टियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'भाट' (Bhat) मृदाएँ यहाँ की प्रमुख विशेष स्थानीय मिट्टियाँ हैं, जिसमें 'मार' मृदा मुख्य रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र की एक चिकनी, काले रंग की अत्यधिक उपजाऊ उपजाऊ मृदा है जो नमी पाकर बहुत चिपचिपी हो जाती है।
2. उत्तर प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु के दौरान पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली अत्यधिक गर्म, शुष्क और धूल भरी हवाओं को 'लू' कहा जाता है, और इस राज्य में सबसे अधिक तापमान वाला जिला आगरा और झाँसी क्षेत्र माना जाता है।
3. उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में पाई जाने वाली नवीन जलोढ़ मृदा को 'खादर' कहा जाता है, जिसमें पोटेशियम और चूने की प्रचुरता होती है, और यह मृदा प्रतिवर्ष बाढ़ के पानी द्वारा नवीकृत होने के कारण कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक विभाजन, मृदा संरचना और कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कृषि और जलवायु की विभिन्नताओं के आधार पर कुल 9 विशिष्ट कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो राज्य के फसल पैटर्न और उत्पादकता को निर्धारित करने में सहायता करते हैं।
2. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड (दक्षिणी पठारी) क्षेत्र में मुख्य रूप से 'मार', 'भाबर', 'र आकर' और 'परुवा' जैसी स्थानीय मृदाएँ पाई जाती हैं, जो कपास और तिलहन की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती हैं।
3. राज्य के 'तराई क्षेत्र' में मिट्टी में नमी की अधिकता होती है और यहाँ की मृदा महीन कणों वाली तथा उपजाऊ होती है, जो मुख्य रूप से धान और गन्ने की बंपर पैदावार के लिए अनुकूल है, लेकिन इस क्षेत्र की मिट्टी में नाइट्रोजन और फास्फोरस की प्रचुर मात्रा पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 (NCF 2005) और बाल अधिकारों के दृष्टिकोण से निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से विकलांग बालकों को सामान्य विद्यालयों में प्रवेश देना है, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
2. NCF 2005 के अनुसार, समावेशी शिक्षा केवल विशेष विद्यालयों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सामान्य विद्यालयों को ही अपनी शिक्षण पद्धतियों, पाठ्यक्रम और भौतिक बुनियादी ढाँचे में ऐसा लचीलापन लाना चाहिए जो प्रत्येक विविधतापूर्ण पृष्ठभूमि और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे की व्यक्तिगत सीखने की गति को स्वीकार कर सके।
3. समावेशी शिक्षा का दर्शन 'अतिरिक्त सहायता और विशिष्ट शिक्षण रणनीतियों' पर जोर देता है ताकि सामान्य कक्षा कक्ष में सभी बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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