जीन पियाजे
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'अधिगम के संज्ञानात्मक और रचनावादी उपागम' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) द्वारा प्रतिपादित 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning: अग्रिम संगठनकर्ता या एडवांस ऑर्गेनाइज़र) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus), 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), और 'एंटोरहिनल कॉर्टेक्स' (Entorhinal Cortex) के बीच मौजूदा संज्ञानात्मक संरचनाओं के साथ नए ज्ञान के एकीकरण (Assimilation), सिनैप्टिक नेटवर्किंग, और स्कीमा पुनर्निर्माण (Schema Reconstruction) की सक्रियण गतिकी, तथा जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'ज्ञानात्मक संतुलन (Equilibration)' मॉडल के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कॉग्निटिव कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी' (Neuro-Cognitive Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में अवधारणात्मक स्पष्टता, आरेखीय मानचित्रण (Concept Mapping) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डेविड औसुबेल का 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) और 'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer) विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान और नए ज्ञान के बीच एक संज्ञानात्मक सेतु का निर्माण करते हैं। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, यह प्रक्रिया मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' की सक्रियता के माध्यम से नए सूचना पैटर्नों को मौजूदा स्कीमा के साथ समेकित (Consolidate) करती है, जिससे 'सिनैप्टिक एकीकरण' और दीर्घकालिक स्मरण (LTP) सुदृढ़ होता है। समावेशी कक्षाओं में यह पेडागोजी विद्यार्थियों की तार्किक और वैचारिक स्पष्टता को बढ़ाते हुए सार्थक ज्ञान निर्माण में सहायक है। अतः विकल्प (a) सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है।
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