जीन पियाजे
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'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage: आत्मकेन्द्रितता, संरक्षण की कमी और अनुत्क्रमणीयता) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), 'ेंट्रल इंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex), और 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) के बीच कार्यकारी कार्यप्रणाली (Executive Function), कार्यशील स्मृति (Working Memory) सीमा, और विकेंद्रीकरण (Decentration) की कमी की सक्रियण गतिकी, तथा लेव वाइगोत्स्की के 'सामाजिक-सांस्कृतिक संज्ञानात्मक विकास' दृष्टिकोण के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कॉग्निटिव ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Cognitive Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी अनुभव, दृश्य-स्थानिक स्कैफोल्डिंग व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation), 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'अनुत्क्रमणीयता' (Irreversibility) जैसी योग्यताओं का अभाव होता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक विज्ञान के दृष्टिकोण से, यह प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex) के पूर्णतः परिपक्व न होने, कार्यकारी कार्यों (Executive Functions) की सीमाओं और हिप्पोकैम्पस से जुड़ी कार्यशील स्मृति (Working Memory) के सीमित विकास के कारण होता है। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में, शिक्षक 'न्यूरो-कॉग्निटिव ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' का उपयोग करके मूर्त सामग्रियों, दृश्य-स्थानिक साधनों और लक्षित स्कैफोल्डिंग के माध्यम से बालकों के संज्ञानात्मक लचीलेपन और समझ को विकसित कर सकते हैं। अतः विकल्प (a) सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है।
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