जीन पियाजे
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'बाल विकास एवं शिक्षण विधियाँ' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage: विशेष रूप से अहंकेन्द्रिता और जीववाद) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - DLPFC), 'इंसुला' (Insula), और 'टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन' (Temporoparietal Junction - TPJ) के बीच परिप्रेक्ष्य लेने की अक्षमता (Inability to Take Perspectives), मानसिक सिमुलेशन, और थ्योरी ऑफ़ माइंड (Theory of Mind) के विकास की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड एलकिंड (David Elkind) के 'अहंकेन्द्रित किशोर सोच और काल्पनिक दर्शक' की अवधारणा के प्रारंभिक पूर्व-चरणों के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कॉग्निटिव डिसेंट्रेशन पेडागोजी' (Neuro-Cognitive Decentration Pedagogy) और विद्यार्थियों में विकेंद्रीकरण (Decentration), सामाजिक-संवेगात्मक परिपक्वता व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 2 से 7 वर्ष) में बच्चों में 'अहंकेन्द्रिता' (यह मानने की प्रवृत्ति कि दूसरे लोग भी वही देखते, सोचते और महसूस करते हैं जो वे खुद करते हैं) और 'जीववाद' (निर्जीव वस्तुओं को सजीव मानना) प्रमुख विशेषताएँ हैं। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, मस्तिष्क के 'टेम्पोरो-पैरिएटल जंक्शन' (TPJ) और 'डर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) जो कि 'थ्योरी ऑफ़ माइंड' (Theory of Mind) और परिप्रेक्ष्य लेने (Perspective Taking) के लिए उत्तरदायी हैं, इस आयु में पूरी तरह परिपक्व नहीं होते हैं। 'न्यूरो-कॉग्निटिव डिसेंट्रेशन पेडागोजी' के तहत शिक्षकों को ऐसी समावेशी शिक्षण रणनीतियों का उपयोग करना चाहिए जो बच्चों को दूसरों के दृष्टिकोण को समझने और विकेंद्रीकरण (Decentration) का अभ्यास करने के अवसर प्रदान करें।
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