शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)
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'अधिगम के सिद्धांत' के अंतर्गत एडविन गुथरी (Edwin Guthrie) द्वारा प्रतिपादित 'समीपता का सिद्धांत' (Contiguity Theory of Learning: उद्दीपक और अनुक्रिया के बीच एक ही समय में होने वाले संयोजन पर आधारित) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मस्तिष्क के 'प्राइमरी मोटर कॉर्टेक्स' (Primary Motor Cortex), 'बेसल गैंग्लिया' (Basal Ganglia), और 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) के बीच तंत्रिका सिंैप्टिक प्लास्टिसिटी (Synaptic Plasticity), एकल-प्रयास अधिगम (Single-Trial Learning), और काइनेस्थेटिक मार्ग सक्रियण की गतिकी, तथा इवान पावलोव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कंटिग्युटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Contiguity Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में तात्कालिक आदत निर्माण, व्यवहार संशोधन व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
एडविन गुथरी (Edwin Guthrie) का 'समीपता का सिद्धांत' (Contiguity Theory) इस बात पर बल देता है कि एक उद्दीपक और एक अनुक्रिया के बीच संयोजन केवल उनके एक साथ घटित होने (Temporal Contiguity) से ही बनता है, जिसके लिए थॉर्नडाइक की तरह किसी पुरस्कार या सुदृढीकरण (Reinforcement) की अनिवार्य आवश्यकता नहीं होती। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, यह प्रक्रिया मस्तिष्क के 'प्राइमरी मोटर कॉर्टेक्स', 'बेसल गैंग्लिया' और 'हिप्पोकैम्पस' के बीच तीव्र सिनाप्टिक समेकन और 'सिंगल-प्रयास लर्निंग' को जन्म देती है। आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में, इस सिद्धांत पर आधारित 'न्यूरो-कंटिग्युटी ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' विद्यार्थियों में तात्कालिक और सही आदत निर्माण, मोटर-कौशल प्रशिक्षण और सकारात्मक व्यवहार संशोधन के लिए अत्यधिक प्रभावी है।
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