जेरोम ब्रूनर
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जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Theory of Cognitive Growth and Discovery Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित ज्ञान के तीन निरूपण रूपों—'क्रियात्मक निरूपण' (Enactive Representation), 'प्रतिबिम्बात्मक निरूपण' (Iconic Representation), और 'प्रतीकात्मक निरूपण' (Symbolic Representation)—के तार्किक क्रमिक विकास और कक्षा-कक्ष शिक्षण में 'सर्पिल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) की संकल्पना के व्यावहारिक अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, बच्चे दुनिया को समझने के लिए तीन प्रमुख निरूपण प्रणालियों का उपयोग करते हैं: 1. क्रियात्मक निरूपण (Enactive - लगभग 0-1 वर्ष, शारीरिक क्रियाओं और मोटर कौशल द्वारा), 2. प्रतिबिम्बात्मक निरूपण (Iconic - लगभग 1-6 वर्ष, मानसिक छवियों और चित्रों द्वारा), और 3. प्रतीकात्मक निरूपण (Symbolic - 7 वर्ष से आगे, भाषा, तर्क और अमूर्त प्रतीकों द्वारा)। ब्रूनर का 'सर्पिल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) इस बात पर जोर देता है कि किसी भी विषय को किसी भी विकासात्मक स्तर पर एक बौद्धिक रूप से ईमानदार रूप में सिखाया जा सकता है, जहाँ जटिल विषयों को सरल रूपों में शुरू करके क्रमिक रूप से अधिक उन्नत और गहरे स्तर पर बार-बार पढ़ाया जाता है।
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अधिगम की अवस्थाओं (Stages of Learning) के प्रतिपादक कौन हैं?
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जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित प्रतिनिधित्व के तीन रूपों—(1) क्रियात्मक प्रतिनिधित्व (Enactive Representation), (2) दृश्य/प्रतिबिम्बात्मक प्रतिनिधित्व (Iconic Representation), और (3) सांकेतिक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation)—तथा उनके 'खोज अधिगम' (Discovery Learning) एवं 'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) की संकल्पनाओं के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में अवधारणात्मक विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के खोजबीन सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन प्रतिनिधित्व स्वरूपों—(1) क्रियात्मक प्रतिनिधित्व (Enactive Representation), (2) दृश्य-प्रतिबिंबात्मक प्रतिनिधित्व (Iconic Representation), और (3) सांकेतिक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation)—तथा 'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक परिपक्वता और अमूर्त संकल्पनाओं के निर्माण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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