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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) और विलियम किलपैट्रिक (William Kilpatrick) द्वारा प्रतिपादित 'प्रोजेक्ट प्रणाली' (Project Method) के अंतर्गत आने वाले चार प्रमुख चरणों—'संज्ञा या सृजन' (Providing Situation), 'योजना बनाना' (Planning), 'क्रियान्वयन या निष्पादन' (Executing), और 'मूल्यांकन' (Evaluating)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ तथा कक्षा-कक्षीय शिक्षण में लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास और प्रयोजनमूलक अधिगम (Purposeful Learning) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से जॉन डीवी के दर्शन और किलपैट्रिक की 'प्रोजेक्ट प्रणाली' का यह कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है कि यह पद्धति छात्रों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ती है। इस विधि में छात्र स्वतंत्र रूप से योजना बनाते हैं, उसका निष्पादन करते हैं और अपने कार्यों का मूल्यांकन स्वयं करते हैं, जिससे उनमें लोकतांत्रिक मूल्य, सामाजिक समायोजन, उत्तरदायित्व और करके सीखने (Learning by Doing) के सिद्धांत का वास्तविक विकास होता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक मैक्स वर्थइमर (Max Wertheimer), कोहका (Koffka) और कोहलर (Köhler) द्वारा प्रतिपादित **'अंतर्दृष्टि या सूझ का सिद्धांत' (Insight Learning / Gestalt Theory)** के अंतर्गत अंतर्निहित **'अचानक संज्ञान या आहा! अनुभव' (Aha! Experience)** की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी किसी समस्या का विश्लेषण करते समय उसके बिखरे हुए घटकों को आंशिक रूप से नहीं बल्कि समग्र रूप से (Holistically) देखता है और अचानक से मानसिक पुनर्गठन (Mental Restructuring) के माध्यम से समस्या का संपूर्ण समाधान प्राप्त कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विहंगम अवलोकन (Overview), संरचनात्मक चिंतन और रचनात्मक समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय शैक्षणिक अवधारणा—**'करके सीखना' (Learning by Doing)**—जिसे इस विचार के रूप में परिभाषित किया जाता है कि शिक्षा केवल निष्क्रिय रूप से ज्ञान को ग्रहण करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह वास्तविक अनुभवों, व्यावहारिक समस्याओं के समाधान और सक्रिय सामाजिक सहभागिता के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान क्षमताओं और लोकतांत्रिक जीवन मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रिचर्ड एम. रायन (Richard M. Ryan) और एडवर्ड एल. डेसी (Edward L. Deci) द्वारा प्रतिपादित 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory - SDT) के अंतर्गत निहित तीन बुनियादी मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं—स्वायत्तता (Autonomy), सक्षमता (Competence), और संबंधितता (Relatedness)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation), संज्ञानात्मक सहभागिता, और मानसिक कल्याण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights)**—जिसे उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता (Post-conventional Morality) के अंतर्गत परिभाषित किया जाता है, जहाँ व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून सामाजिक अनुबंध के रूप में हैं न कि कठोर आदेश, और यदि कोई कानून व्यक्तिगत अधिकारों या समाज के कल्याण की रक्षा नहीं करता है, तो उसमें लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव किया जाना चाहिए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों, आलोचनात्मक वैधानिक चिंतन और न्यायोचित निर्णय लेने की क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness), 'अभ्यास का नियम' (Law of Exercise - जिसमें उपयोग और अनुपयोग के नियम शामिल हैं), तथा 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संतोषजनक अनुक्रियाओं के समेकन (Consolidation of S-R Bonds), त्रुटिहीन अधिगम, और संज्ञानात्मक सहसंबद्धता के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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