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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, आईवान पाव्लोव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित अस्वाभाविक उद्दीपक (Conditioned Stimulus) और स्वाभाविक उद्दीपक (Unconditioned Stimulus) के साहचर्य की प्रक्रिया में 'उद्दीपक सामान्यीकरण' (Stimulus Generalization), 'विभेदक अनुबंधन' (Discriminative Conditioning), और 'प्रायोगिक विलोपन' (Experimental Extinction) की वास्तविक मनोवैज्ञानिक संकल्पनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन कक्षा-कक्षीय शिक्षण और अधिगम वातावरण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पाव्लोव के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत में 'उद्दीपक सामान्यीकरण' (Stimulus Generalization) का अर्थ है कि जब एक बार किसी उद्दीपक के प्रति अनुक्रिया स्थापित हो जाती है, तो वैसे ही मिलते-जुलते अन्य उद्दीपकों के प्रति भी वैसी ही अनुक्रिया होने लगती है। वहीं 'विभेदक अनुबंधन' (Discrimination) शिक्षार्थी को मूल उद्दीपक और अन्य समान उद्दीपकों के बीच सूक्ष्म अंतर करने की क्षमता प्रदान करता है। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में, यह अवधारणा बच्चों को सामान्यीकरण और विभेदीकरण के माध्यम से ज्ञान के सटीक अंतरण (Transfer of Learning) में मदद करती है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कुर्ट लेविन (Kurt Lewin) के 'क्षेत्र सिद्धांत' (Field Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'जीवन स्पेस या जीवन क्षेत्र' (Life Space)**—जिसे उस कुल मनोवैज्ञानिक परिवेश या क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें किसी विशिष्ट समय पर व्यक्ति और उसका मनोवैज्ञानिक वातावरण (Psychological Environment) अंतःक्रिया करते हैं (जहाँ $B = f(P, E)$ अर्थात व्यवहार व्यक्ति और उसके पर्यावरण का फलन है)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यवहारगत परिवर्तन, प्रेरणा और संज्ञानात्मक पुनर्विन्यास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, ब्रूनेर (Jerome Bruner) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के तीन चरणों—'क्रियात्मक अवस्था' (Enactive Stage), 'प्रतिबिम्बात्मक अवस्था' (Iconic Stage), और 'संकेतात्मक अवस्था' (Symbolic Stage)—के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक सटीक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन प्रमुख चिंतन निरूपणों—(1) क्रियात्मक प्रतिनिधित्व (Enactive Representation), (2) दृश्य-प्रतिमात्मक प्रतिनिधित्व (Iconic Representation), और (3) सांकेतिक प्रतिनिधित्व (Symbolic Representation)—तथा 'अन्वेषण अधिगम' (Discovery Learning) की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) के माध्यम से अमूर्त तार्किक संरचनाओं के निर्माण, भाषा और विचार के समन्वय तथा स्वतंत्र बौद्धिक अन्वेषण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित **'अन्वेषण अधिगम या खोज अधिगम' (Discovery Learning)** तथा ज्ञान की तीन निरूपण प्रणालियों—**क्रियात्मक (Enactive), दृश्य-प्रतिमात्मक (Iconic), और प्रतीकात्मक (Symbolic)**—की अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सक्रिय ज्ञान-निर्माण, संरचनात्मक चिंतन और बौद्धिक परिपक्वता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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