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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, पाउवलोव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'विलोपन' (Extinction), 'स्वतः पुनःप्रकट होना' (Spontaneous Recovery), 'उद्दीपक सामान्यीकरण' (Stimulus Generalization) और 'विभेदक अनुबंधन' (Discriminative Conditioning) की प्रक्रियाओं के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के भय, पूर्वाग्रह तथा आदतों के नियमन व वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
इवान पाउवलोव (Ivan Pavlov) के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत में 'विलोपन' (Extinction) वह प्रक्रिया है जिसमें अनुबंधित उद्दीपक (CS) को बिना अनियंत्रित उद्दीपक (UCS) के बार-बार प्रस्तुत करने पर अनुबंधित अनुक्रिया (CR) लुप्त होने लगती है। हालांकि, कुछ समय के विश्राम के बाद यदि वही CS पुनः प्रस्तुत किया जाए तो अनुक्रिया कुछ मात्रा में पुनः प्रकट हो जाती है, जिसे 'स्वतः पुनःप्रकट होना' (Spontaneous Recovery) कहते हैं। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में शिक्षकों के लिए यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि विद्यार्थियों के अवांछित व्यवहार या भय (जो शास्त्रीय अनुबंधन द्वारा सीखे गए हैं) का विलोपन करने के बावजूद वे तनावपूर्ण परिस्थितियों में पुनः उभर सकते हैं, अतः उनके स्थायी सुधार के लिए निरंतर वैज्ञानिक प्रबंधन और सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता होती है।
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