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Indian Polity
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संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'संविधान के संशोधन' की प्रक्रिया बताता है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 368 के तहत संसद संविधान में संशोधन कर सकती है।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली, शक्तियों और संवैधानिक उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत ने पारित किया हो और जिससे लोक सभा सहमत हो, किंतु इस प्रकार के संकल्प को प्रस्तावित करने के लिए कम से कम चौदह दिन पूर्व की लिखित सूचना देना अनिवार्य है। 2. संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, जिसका विधिक निहितार्थ यह है कि राष्ट्रपति किसी भी मंत्री को बिना प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सलाह के अपनी स्वतंत्र इच्छा से बर्खास्त कर सकता है, क्योंकि यह राष्ट्रपति की एक अनियंत्रित विवेकीय शक्ति है। 3. संविधान के अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन संबंधी और मंत्रिपरिषद के विनिश्चयों (Decisions) से संबंधित सभी संसूचियाँ राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसा अपेक्षा करे तो मंत्रिपरिषद के समक्ष किसी ऐसे विषय को विचार के लिए रखे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किंतु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग-II (अनुच्छेद 5 से 11) के अंतर्गत नागरिकता के संवैधानिक उपबंधों और संसद की विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी प्रावधानों के तहत भारत का नागरिक है या समझा जाता है, वह संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए नागरिक बना रहेगा, जिसका अर्थ यह है कि संसद साधारण कानून के माध्यम से भी किसी व्यक्ति की नागरिकता को बिना किसी विधायी प्रक्रिया के सीधे समाप्त कर सकती है। 2. अनुच्छेद 7 के प्रावधान के तहत जो व्यक्ति 1 मार्च 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान के लिए प्र्रव्रजन (Migrate) कर गया था, वह भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा, किंतु यदि वह व्यक्ति भारत में पुनर्वास (Resettlement) के लिए अनुज्ञापत्र (Permit) के आधार पर वापस लौट आता है, तो उसे अनुच्छेद 6 के तहत पंजीकरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार मिल जाता है। 3. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि बनाने की संपूर्ण और अनन्य शक्ति प्रदान करता है, और इस शक्ति के अंतर्गत संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के बाहर के भू-भाग पर भी प्रभावी है (Extra-territorial operation)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के उपबंधों (अनुच्छेद 5-11) और संसद की विधाई शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को यह स्पष्ट अधिकार दिया गया है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सकती है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 को अधिनियमित किया था। 2. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार भारत का कोई भी नागरिक, जिसे भाग II के प्रावधानों के तहत नागरिक माना गया है, संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के उपबंधों के अधीन रहते हुए भी अपनी नागरिकता से वंचित नहीं किया जा सकता, अर्थात् संसद नागरिकता छीनने के लिए कोई भूतलक्षी (Retrospective) कानून नहीं बना सकती है। 3. अनुच्छेद 9 के अंतर्गत यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता अनुच्छेद 5, 6 या 8 के अंतर्गत स्वतः समाप्त नहीं मानी जाएगी जब तक कि केंद्र सरकार विधिवत रूप से उसे वंचित (Deprivation) करने का आदेश जारी न करे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? मूल रूप से भारतीय संविधान में कुल कितने मौलिक अधिकार थे? भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को 'रिट' (Writ) जारी करने की शक्ति देता है?
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