संज्ञानात्मक विकास
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जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रयोगात्मक शिक्षावाद' (Experimentalism) एवं 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) की पाँच चरणों वाली प्रक्रिया—जिसमें 'सुझाव', 'समस्या का बौद्धिकरण', 'परिकल्पना', 'तर्क', और 'परिकल्पना का परीक्षण' शामिल हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या-समाधान की क्षमता, और अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जॉन डीवी (John Dewey) का 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) का सिद्धांत शिक्षा में 'करके सीखने' (Learning by Doing) और प्रयोगात्मक शिक्षावाद की नींव है। इसके अनुसार, चिंतनशील चिंतन केवल विचारों का आना नहीं है, बल्कि यह एक सक्रिय, निरंतर और गंभीर मूल्यांकन है जो किसी मान्यता या ज्ञान को उसके तार्किक परिणामों और साक्ष्यों के आधार पर परखता है। कक्षा-कक्ष में यह विधि विद्यार्थियों को निष्क्रिय श्रोता के बजाय सक्रिय अन्वेषक बनाती है, जिससे उनकी आलोचनात्मक सोच, तार्किक संश्लेषण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का सुदृढ़ीकरण होता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagné) के 'अधिगम के अनुक्रमिक सिद्धांत' (Conditions of…
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डेविड पॉसनेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रगामी संगठक' (Advance Organizers) की अवधारणा—जिसके तहत नई अधिगम सामग्री को प्रस्तुत करने से पहले विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक ज्ञान (Existing Anchoring Ideas) के साथ नए संप्रत्ययों को जोड़ने के लिए उच्च-स्तरीय अमूर्त और समावेशी प्रस्तावनाओं का उपयोग किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'अवरोही ज्ञान अंतरण' (Deductive Knowledge Transfer), संज्ञानात्मक संरचना के सुदृढ़ीकरण, और अर्थपूर्ण अवधारणात्मक स्पष्टता के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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