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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'व्यक्तित्व की संरचना' (Structure of Personality) में 'अहं रक्षा तंत्र' (Ego Defense Mechanisms) के एक विशिष्ट प्रकार के रूप में वर्णित 'तर्कसंगतीकरण' (Rationalization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी असफलताओं, अस्वीकार्य व्यवहारों या अनैतिक इच्छाओं को समाज-स्वीकार्य और तार्किक कारणों से ढंकने का प्रयास करता है ताकि वह अपनी आत्म-छवि (Self-Image) और आत्म-सम्मान को मानसिक आघात से बचा सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के रक्षात्मक व्यवहार, मानसिक समायोजन, और तनाव प्रबंधन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत में 'अहं रक्षा तंत्र' (Ego Defense Mechanisms) अचेतन मन की वे युक्तियाँ हैं जिनका उपयोग अहंकार (Ego) तनाव, चिंता और आघात से बचने के लिए करता है। 'तर्कसंगतीकरण' (Rationalization) एक ऐसा ही रक्षा तंत्र है जिसमें व्यक्ति अपनी किसी विफलता, गलती या अस्वीकार्य आचरण के लिए ऐसे बौद्धिक और सामाजिक रूप से स्वीकार्य तर्क या कारण प्रस्तुत करता है जो वास्तविकता से भिन्न होते हैं लेकिन व्यक्ति को मानसिक संतुष्टि और आत्म-सम्मान की रक्षा प्रदान करते हैं (उदाहरणार्थ: 'अंगूर खट्टे हैं' का लोकोक्ति उदाहरण)। MPTET के बाल मनोविज्ञान खंड के अनुसार, शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि अत्यधिक तर्कसंगतीकरण विद्यार्थियों में वास्तविक समस्याओं के निवारण से बचने की प्रवृत्ति पैदा कर सकता है, इसलिए नैदानिक शिक्षण के दौरान उनके रक्षात्मक व्यवहारों की पहचान कर उन्हें यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) तथा 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) के पाँच चरणों—(1) सुझाव (Suggestion), (2) बौद्धिकरण (Intellectualization), (3) परिकल्पना (Hypothesis), (4) तर्क (Reasoning), और (5) परीक्षण (Testing)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक जिज्ञासा, अनुभवात्मक समस्या-समाधान, और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शेपिंग या आकार देना' (Shaping) की अवधारणा—जिसके तहत किसी जटिल या पूरी तरह से नवीन अवांछित या वांछित व्यवहार को सीधे एक बार में प्राप्त करने के बजाय, लक्ष्य व्यवहार के क्रमिक और निकटतम सन्निकटन (Successive Approximations) चरणों को सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) प्रदान करके धीरे-धीरे वांछित अंतिम व्यवहार को ढालकर स्थापित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशलों के अर्जन, चरणबद्ध प्रगति और सकारात्मक सुदृढ़ीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Hierarchy of Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर के अधिगम—अर्थात 'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)—तथा इससे ठीक पूर्व के स्तरों जैसे 'सिद्धांत अधिगम' (Rule Learning) और 'प्रत्यय अधिगम' (Concept Learning) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक क्षमताओं, तार्किक नियमों के सामान्यीकरण (Generalization), और जटिल बौद्धिक समस्याओं के स्वतंत्र विश्लेषण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के चरम चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी सामाजिक नियम या कानून के अंधे अनुपालन के बजाय अपने स्वयं के अंतःकरण, सार्वभौमिक मानवाधिकारों, न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के आंतरिक रूप से चयनित स्व-निर्धारित नैतिक सिद्धांतों के आधार पर सही और गलत का निर्णय करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय आलोचनात्मक नैतिक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वायत्त निर्णय-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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