अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ
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जॉन फ्लैवेल (John Flavell) के 'मेटाकॉग्निशन या अधिविज्ञान' (Metacognition) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'अधिविज्ञानात्मक ज्ञान' (Metacognitive Knowledge) और 'अधिविज्ञानात्मक विनियमन' (Metacognitive Regulation) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने स्वयं के संज्ञानात्मक प्रक्रमों (जैसे- सोचना, समझना, याद रखना) के बारे में ज्ञान रखता है तथा अपनी सीखने की रणनीतियों की योजना बनाना, उनकी निगरानी करना और उनका मूल्यांकन करना सीखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त अधिगम (Autonomous Learning), रणनीतिक चिंतन और आत्म-विनियमित शिक्षण (Self-Regulated Learning) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के दृष्टिकोण से जॉन फ्लैवेल (John Flavell) द्वारा प्रतिपादित 'अधिविज्ञान' (Metacognition) अर्थात 'ज्ञान के बारे में ज्ञान' या 'चिंतन के बारे में चिंतन' एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक अवधारणा है। अधिविज्ञान के दो मुख्य आयाम हैं: अधिविज्ञानात्मक ज्ञान (अपने और दूसरों के संज्ञानात्मक प्रक्रमों की समझ) और अधिविज्ञानात्मक विनियमन (अपने अधिगम को निर्देशित करने के लिए योजना बनाना, निगरानी करना और उसका मूल्यांकन करना)। विकल्प (b) इस अवधारणा के वैज्ञानिक और कक्षा-कक्षीय निहितार्थ को पूर्ण रूप से स्पष्ट करता है क्योंकि जब छात्र अपनी सीखने की प्रक्रिया को खुद विनियमित (Self-regulate) करना सीख जाते हैं, तो वे अधिक स्वायत्त, प्रभावी और दक्ष अधिगमकर्ता बनते हैं। अन्य विकल्प तथ्यात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से त्रुटिपूर्ण हैं।
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डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अधिगम शैली—'अभिसारी अधिगम शैली' (Convergent Learning Style)—जिसे उस व्यावहारिक मानसिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ शिक्षार्थी अमूर्त अवधारणाओं (Abstract Conceptualization) और सक्रिय प्रयोग (Active Experimentation) का उपयोग करके तकनीकी समस्याओं के एकल, सर्वोत्तम और सटीक समाधान तलाशता है तथा विचारों को व्यावहारिक उपयोग में लाने में दक्ष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विश्लेषण, तकनीकी कौशल और समस्या-समाधान की वैज्ञानिक क्षमताओं के संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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