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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेर्हाड रीनहार्ड और अन्य शिक्षाशास्त्रियों द्वारा विकसित तथा कार्ल रोजर्स एवं अब्राहम मैस्लो के मानवतावादी उपागम पर आधारित 'सहानुभूतिपूर्ण और छात्र-केंद्रित कक्षा-वातावरण' (Empathetic and Learner-Centered Classroom Environment) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अबाधित संवेगात्मक अभिव्यक्ति और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा' (Psychological Safety) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थियों को बिना किसी आलोचना, पूर्वाग्रह या भय के अपने विचारों, संवेगों और व्यक्तिगत अनुभवों को खुलकर व्यक्त करने की स्वतंत्रता दी जाती है तथा शिक्षक एक गैर-निर्णयात्मक (Non-judgmental) और स्वीकार्य मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक अभिप्रेरण, आत्म-सम्मान (Self-esteem), रक्षा तंत्रों (Defense Mechanisms) के न्यूनीकरण और संज्ञानात्मक जोखिम उठाने की क्षमता (Cognitive Risk-Taking) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मानवतावादी मनोविज्ञान और तंत्रिका-शिक्षाशास्त्र (Neuroeducation) के अनुसार, जब कक्षा में मनोवैज्ञानिक सुरक्षा (Psychological Safety) और संवेगात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है, तो मस्तिष्क का भावनात्मक केंद्र 'अमिगडाला' भय या चिंता मुक्त रहता है। इससे निर्णय लेने, तार्किक चिंतन और संज्ञानात्मक जोखिम उठाने के लिए उत्तरदायी 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' बेहतर ढंग से कार्य कर पाता है। विकल्प (a) इस वैज्ञानिक तथ्य को पूरी तरह पुष्ट करता है कि सुरक्षित वातावरण आंतरिक प्रेरणा और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा देता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'लग्नता या आसक्ति सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'असुरक्षित-प्रतिरोधी आसक्ति' (Insecure-Resistant / Ambivalent Attachment) तथा 'असुरक्षित-विमुख आसक्ति' (Insecure-Avoidant Attachment) के व्यवहारिक लक्षणों के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में प्रारंभिक बाल्यावस्था के अनुभवों से विद्यार्थियों में उत्पन्न होने वाले 'भावनात्मक विनियमन' (Emotional Regulation) के संकट तथा 'शिक्षकों के प्रति सुरक्षित आधार' (Secure Base) की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संज्ञानात्मक अवधारणा—**'अग्रगामी संगठक' (Advance Organizer)**—जिसे किसी नवीन और जटिल विषयवस्तु को पढ़ाने से पहले प्रस्तुत की जाने वाली एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त अवधारणात्मक रूपरेखा के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो शिक्षार्थी की दीर्घकालिक स्मृति में पहले से मौजूद प्रासंगिक ज्ञान (Prior Knowledge / Cognitive Structure) और नई आने वाली सूचनाओं के बीच एक वैचारिक सेतु का कार्य करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सार्थक ज्ञान निर्माण (Meaningful Knowledge Construction), संज्ञानात्मक समावेशन (Subsumption) और दीर्घकालिक सूचना प्रतिधारण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद (Connectionism) या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत किसी अधिगमकर्ता में तंत्रिका तंत्र (Neural Pathways) की तैयारी और उसकी आंतरिक मानसिक तत्परता का सीधा संबंध संतुष्टि या झुंझलाहट से होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा प्रबंधन, अधिगम चक्र और संज्ञानात्मक सक्रियता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage)**—जिसे लगभग 7 से 11 वर्ष की आयु के बीच परिभाषित किया जाता है, जहाँ बालक वस्तुओं और घटनाओं के वास्तविक, मूर्त और प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर तार्किक रूप से सोचना शुरू कर देता है तथा किस केंद्रीय मानसिक क्षमता—**'संरक्षण' (Conservation)**—(अर्थात यह समझ विकसित होना कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है) को पूरी तरह से आत्मसात कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक वर्गीकरण, आनुक्रमिकता और व्यावहारिक गणितीय अवधारणाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'सकारात्मक पुनर्बलन' (Positive Reinforcement), 'नकारात्मक पुनर्बलन' (Negative Reinforcement), 'प्राथमिक एवं गौण पुनर्बलक' (Primary and Secondary Reinforcers) तथा 'पुनर्बलन अनुसूचियों' (Schedules of Reinforcement - जैसे निश्चित अंतराल, परिवर्तनशील अनुपात आदि) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में वांछित व्यवहारों के shaping (रूप देने) और अधिगम की निरंतरता के विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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