संज्ञानात्मक विकास
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जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम' (Progressive Education and Experiential Learning) के दर्शन के अंतर्गत प्रतिपादित 'रिफ्लेक्टिव थिंकिंग या विचारात्मक चिंतन' (Reflective Thinking) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी किसी संशयपूर्ण, जटिल या समस्यात्मक परिस्थिति में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने पूर्व अनुभवों का तार्किक मूल्यांकन, परिकल्पनाओं का निर्माण और वैज्ञानिक सत्यापन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समस्या-समाधान कौशल, आलोचनात्मक मूल्यांकन और स्वतंत्र बौद्धिक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जॉन डीवी के प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम दर्शन के अनुसार 'रिफ्लेक्टिव थिंकिंग' (विचारात्मक चिंतन) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शिक्षार्थी किसी अस्पष्ट या समस्याग्रस्त स्थिति का सामना करते हुए उसे तार्किक और वैज्ञानिक तरीके से सुलझाने का प्रयास करता है। यह विद्यार्थियों को निष्क्रिय ज्ञान ग्रहण करने वाले के बजाय एक सक्रिय अन्वेषक बनाता है, जिससे उनके आलोचनात्मक मूल्यांकन, समस्या-समाधान और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा मिलता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'विकेंद्रीकरण या विकेंद्रण' (Decentration) की अवधारणा—जिसके तहत बालक किसी वस्तु, समस्या या परिस्थिति के केवल एक ही आयाम, पहलू या दृश्य पर ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं, आयामों और तार्किक संबंधों को एक साथ देखने और समझने की संज्ञानात्मक क्षमता प्राप्त कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहु-आयामी चिंतन, संरक्षण (Conservation) की समझ और तार्किक तार्किकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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रॉबर्ट गेग्ने (Robert Gagné) के 'अधिगम के अनुक्रमिक सोपान' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning - सर्वोच्च सोपान) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और कौशलों को संयोजित करके किसी नवीन, जटिल और अनसुलझी परिस्थिति में तार्किक रूप से नए नियमों का सृजन करते हुए अपने ज्ञान का विस्तार करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, सृजनात्मक चिंतन और स्वायत्त बौद्धिक अनुप्रयोग के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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