जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवधारणा—'स्पाइरल पाठ्यक्रम या चक्राकार पाठ्यचर्या' (Spiral Curriculum)—जिसके तहत किसी भी कठिन विषय वस्तु या मूल संकल्पना को प्राथमिक स्तर पर बच्चे की उम्र और संज्ञानात्मक स्तर के अनुकूल बेहद सरल, मूर्त और सहज रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तथा जैसे-जैसे शिक्षार्थी उच्च कक्षाओं में पहुँचता है, उसी विषय या संकल्पना को बार-बार अधिक जटिल, अमूर्त और व्यापक स्तर पर गहराई से पुनः प्रस्तुत किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा के क्रमिक विस्तार, संज्ञानात्मक स्थिरता और सार्थक संरचनात्मक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जेरोम ब्रूनर द्वारा प्रतिपादित 'स्पाइरल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) इस मनोवैज्ञानिक मान्यता पर आधारित है कि किसी भी विषय या संकल्पना को बच्चों की विकासात्मक अवस्थाओं के अनुरूप बार-बार, अधिक गहराई और जटिलता के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। विकल्प (सी) इस सिद्धांत की सबसे सटीक व्याख्या करता है क्योंकि यह रेखांकित करता है कि बालक के पूर्व-अर्जित ज्ञान (Prior Knowledge) और स्कीमा को नए, उन्नत एवं अमूर्त विचारों से क्रमिक रूप से कैसे जोड़ा जाता है। ब्रूनर के अनुसार, ज्ञान कोई एक बार में समाप्त होने वाली वस्तु नहीं है, बल्कि यह एक सतत और बढ़ती हुई सर्पीली प्रक्रिया है, जिससे शिक्षार्थी के बौद्धिक विकास को दृढ़ता मिलती है और वे उच्च स्तरीय संज्ञानात्मक स्तर प्राप्त करते हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- ब्रूनर के अनुसार बच्चे तीन चरणों में सीखते हैं: अधिनियमित (Enactive), प्रतीकात्मक (Iconic), और संकेतात्मक (Symbolic)।
- स्पाइरल पाठ्यक्रम रटने या निष्क्रिय स्मरण के विपरीत सक्रिय खोजपूर्ण अधिगम (Discovery Learning) को प्रोत्साहित करता है।
- विकल्प (ए) गलत है क्योंकि चक्राकार पाठ्यचर्या से अरुचि नहीं बल्कि जिज्ञासा और गहरी समझ विकसित होती है।
- विकल्प (बी) और (डी) भ्रामक हैं क्योंकि ज्ञान रैखिक नहीं बल्कि सर्पीली संरचना में विकसित होता है, और यह आंतरिक अभिप्रेरण पर जोर देता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जेरोम ब्रूनर का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि शिक्षक को बच्चों की विकासात्मक अवस्थाओं के अनुसार पाठ्यक्रम को इस प्रकार डिजाइन करना चाहिए कि ज्ञान का क्रमिक विस्तार हो। अधिक जानकारी के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत और वाइगोत्स्की का सिद्धांत भी देखें जो रचनावादी दृष्टिकोण साझा करते हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटीईटी (CTET) और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास और स्पाइरल पाठ्यक्रम से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। शिक्षकों के लिए यह समझना अनिवार्य है कि कक्षा में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को केवल एकमुश्त ज्ञान परोसने के बजाय बच्चों के संज्ञानात्मक स्तर के अनुरूप चरणों में ढालना चाहिए। जब एक ही विषय को प्राथमिक स्तर पर मूर्त रूप में और उच्च प्राथमिक स्तर पर अमूर्त नियमों के साथ पढ़ाया जाता है, तो विद्यार्थियों का मानसिक स्कीमा अधिक मजबूत और स्थायी बनता है। यह दृष्टिकोण रचनावाद (Constructivism) की नींव को मजबूत करता है जहाँ छात्र स्वयं अपने ज्ञान के निर्माता बनते हैं।