निदानात्मक एवं उपचारात्मक शिक्षण
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,000 times
नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) के 'शाखाओं वाले क्रमादेशित अनुदेशन सिद्धांत' (Branching Programmed Instruction Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय शैक्षणिक अवधारणा—'आंतरिक निदान और उपचारात्मक शाखाएं' (Intrinsic Programming / Remedial Branching)—जिसे एक ऐसी सुधारात्मक प्रणाली के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ मुख्य पाठ्य सामग्री के दौरान शिक्षार्थी की त्रुटियों या गलत उत्तरों के आधार पर उसे स्वतः ही तुरंत विशिष्ट उपचारात्मक अनुभागों या शाखाओं (Remedial Sub-routines) की ओर भेज दिया जाता है, ताकि वह मुख्य धारा में लौटने से पहले अपनी वैचारिक त्रुटियों को स्वतंत्र रूप से सुधार सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-गतिशील अधिगम (Self-paced Learning), व्यक्तिगत भिन्नताओं के समायोजन और तात्कालिक पुनर्भरण (Immediate Feedback) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
नॉर्मन क्राउडर द्वारा प्रतिपादित 'शाखाओं वाले क्रमादेशित अनुदेशन' (Branching Programmed Instruction) में आंतरिक निदान और उपचारात्मक शाखाओं (Remedial Branching) का विशेष महत्व है। यह सिद्धांत इस मान्यता पर आधारित है कि प्रत्येक शिक्षार्थी की गति और सीखने की शैली अलग होती है (व्यक्तिगत भिन्नताएं)। जब शिक्षार्थी किसी बहुविकल्पीय प्रश्न का गलत उत्तर देता है, तो सिस्टम स्वतः उसकी त्रुटि का निदान करके उसे एक विशेष उपचारात्मक अनुभाग (Branch) में भेज देता है जहाँ वह उस अवधारणा को दोबारा समझता है और फिर मुख्य धारा में लौटता है। यह विद्यार्थियों में स्व-गतिशील अधिगम और तात्कालिक पुनर्भरण को सुनिश्चित करता है।
अगला प्रश्न →
नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) के 'शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन' (Branching…
← पिछला प्रश्न
नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) द्वारा प्रतिपादित…
Related Questions
→
क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) के क्षेत्र में स्टीफन कोरी (Stephen Corey) और डेविड हूपर (David Hopkins) द्वारा विकसित मॉडलों का शिक्षण विधियों के सुधार के संदर्भ में सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, जब एक शिक्षक अपनी कक्षा में किसी विशेष पठन अक्षमता (जैसे डिस्लेक्सिया) से जूझ रहे छात्रों के लिए 'उपचारात्मक शिक्षण विधि' (Remedial Teaching Method) के प्रभाव का मूल्यांकन करने हेतु त्वरित और व्यावहारिक शोध चक्र चलाता है, तब इस प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इसकी तात्विक और कार्यप्रणालीगत विशेषता को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
→
'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के विशिष्ट प्रकार 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia - लेखन और मोटर-ग्राफिक प्रसंस्करण अक्षमता) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मस्तिष्क के 'बाएँ गोलार्ध के एक्सरूरियल मोटर कॉर्टेक्स' (Exrorial Motor Cortex / Motor Strip - हाथ की सूक्ष्म मांसपेशियों का नियंत्रण), 'बेसल गैन्ग्लिया' (Basal Ganglia - मोटर कौशल का क्रमांकन और स्वचालित लेखन), तथा 'सेरिबैलम' (Cerebellum - हस्त-नेत्र समन्वय और लेखन लयबद्धता) के बीच न्यूरो-मस्कुलर समन्वय विफलता, दृश्य-स्थानिक और गतिज एकीकरण (Visuo-Motor Integration) में बाधा की सक्रियण गतिकी, तथा अलेक्जेंडर लुरिया के 'कार्यात्मक मस्तिष्क इकाइयों' (Functional Units of Brain) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिस्ग्राफिया ऑप्टिमाइज्ड मल्टीसेंसरी काइनेस्थेटिक पेडागोजी' (Neuro-Dysgraphia Optimized Multisensory Kinesthetic Pedagogy) और विद्यार्थियों में ग्राफिक प्रतीक निर्माण, सूक्ष्म पेशीय समन्वय व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (Continuous and Comprehensive Evaluation - CCE) के मुख्य उद्देश्यों और इसकी प्राथमिक स्तर पर क्रियान्वयन की पद्धति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
→
शैक्षणिक मूल्यांकन (Educational Assessment) के अंतर्गत 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (Continuous and Comprehensive Evaluation - CCE) तथा 'आकलन और मूल्यांकन' (Assessment vs Evaluation) के तात्विक, सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय केवल सत्र के अंत में योगात्मक परीक्षा (Summative Assessment) आयोजित करने के स्थान पर सत्र के दौरान नियमित रूप से रचनात्मक आकलन (Formative Assessment) को अपनाता है और शिक्षार्थी के संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा मनोगतत्मक सभी पक्षों के गुणात्मक एवं मात्रात्मक विकास का निरंतर अभिलेखन करता है, तो इस आधुनिक शैक्षिक मूल्यांकन प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
→
हिंदी भाषा शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया में 'उपचारात्मक शिक्षण' (Remedial Teaching) का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की अधिगम संबंधी कठिनाइयों और त्रुटियों को दूर करना है। इस संदर्भ में, उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया का सबसे पहला और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक चरण निम्नलिखित में से कौन सा माना जाता है?
→
हिंदी भाषा शिक्षण में 'उपचारकीय शिक्षण' (Remedial Teaching) के मुख्य उद्देश्य और उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक उपयुक्त एवं तार्किक है?
→
नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) के 'शाखीय प्रोग्राम्ड अनुदेशन' (Branching Programmed Instruction) या 'अन्वेषी अनुदेशन' (Intrinsic/Branching Programming) के अंतर्गत प्रतिपादित 'निदानात्मक और उपचारात्मक शाखाओं' (Diagnostic and Remedial Branching Mechanism) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी के प्रत्येक बहुविकल्पीय उत्तर के आधार पर उसके ज्ञान की कमियों का तुरंत निदान किया जाता है और उसे उसकी व्यक्तिगत गति व समझ के अनुसार अलग-अलग उपचारात्मक या सुधारात्मक उप-पाठों (Branches) की ओर निर्देशित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं (Individual Differences), स्वायत्त अधिगम (Autonomous Learning) और तार्किक त्रुटि-विश्लेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) द्वारा प्रतिपादित 'शाखाबद्ध अनुदेशन' (Branching Programmed Instruction) के अंतर्गत आने वाले आंतरिक निदानात्मक लूप (Intrinsic Diagnostic Loop) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया के आधार पर उसे उसकी त्रुटियों के अनुसार उपचारात्मक व्याख्या या विशिष्ट उप-शाखाओं (Sub-branches) की ओर निर्देशित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं के प्रबंधन और स्व-गतिशील अधिगम (Self-paced Learning) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.