जीन पियाजे
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage)—जिसे लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक चलने वाली उस उन्नत संज्ञानात्मक चरण के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक मूर्त वस्तुओं की सीमाओं से परे जाकर अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking), परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning) और वैज्ञानिक पद्धति से समस्याओं के समाधान की क्षमता अर्जित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय विश्लेषणात्मक कौशल, वैचारिक लचीलेपन और बहुआयामी दृष्टिकोण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत की अंतिम और सर्वोच्च अवस्था 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (11 वर्ष से आगे) है। इस अवस्था की मुख्य विशेषता परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning) और अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) का विकास है। छात्र इस स्तर पर केवल प्रत्यक्ष या मूर्त साक्ष्यों पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि वे विभिन्न संभावनाओं के आधार पर परिकल्पनाएं बनाते हैं, उनका परीक्षण करते हैं और जटिल वैज्ञानिक व गणितीय समस्याओं का तार्किक विश्लेषण करने में सक्षम होते हैं। अतः विकल्प (d) इस वैज्ञानिक अवधारणा का सबसे सटीक और प्रामाणिक मनोवैज्ञानिक निरूपण है।
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कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) और 'व्युत्क्रमित या अनुभवजन्य अधिगम सिद्धांत' (Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अर्थपूर्ण अनुभवात्मक अधिगम' (Significant Experiential Learning) की अवधारणा—जिसके तहत अधिगम तब होता है जब छात्र की व्यक्तिगत जिज्ञासा, उसकी अपनी समस्याओं और उसके स्व-सचेतन (Self-initiated) अनुभवों के साथ विषय-वस्तु जुड़ जाती है, और शिक्षक केवल एक 'सहायक या सुविधाप्रदाता' (Facilitator) की भूमिका निभाता है न कि एक पारंपरिक ज्ञान के प्रदाता की—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-निर्देशित अधिगम, संवेगात्मक संलग्नता और व्यक्तिगत स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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पियाजे के अनुसार, 'संज्ञानात्मक विकास' (Cognitive Development) में 'समायोजन' (Accommodation) का क्या अर्थ है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'अमूर्त चिंतन' (Formal Operational Stage) की अवस्था निम्नलिखित में से किस आयु वर्ग से संबंधित है?
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'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: अमूर्त चिंतन और निगमनात्मक तर्क) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - DLPFC), 'पैरिएटल कॉर्टेक्स' (Parietal Cortex), और 'पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - ACC) के बीच कार्यकारी नियंत्रण, अमूर्त परिकल्पना निर्माण (Hypothesis Generation), और तार्किक लचीलेपन की सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर के 'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation) मॉडल के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कोग्निटिव ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Cognitive Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या-समाधान कौशल व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक प्रक्रिया—'समायोजन या समंजन' (Accommodation)—जिसे उस संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक अपने पूर्व-मौजूद मानसिक स्कीमा (Schema) में किसी नई जानकारी, वस्तु या अनुभव के फिट न बैठने पर या तो अपने पुराने स्कीमा में संशोधन करता है या एक नए स्कीमा का निर्माण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वैचारिक पुनर्गठन, संज्ञानात्मक संघर्ष (Cognitive Conflict) के समाधान और उच्च-स्तरीय अनुकूलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage)—जिसे लगभग 7 से 11 वर्ष की आयु के बीच परिभाषित किया जाता है, जहाँ बालक वस्तुओं और घटनाओं के वास्तविक, मूर्त और प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर तार्किक रूप से सोचना शुरू कर देता है तथा किस केंद्रीय मानसिक क्षमता—'संरक्षण' (Conservation)—(अर्थात यह समझ विकसित होना कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है) को पूरी तरह से आत्मसात कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक वर्गीकरण, आनुक्रमिकता और व्यावहारिक गणितीय अवधारणाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवधारणा—'विकेन्द्रण या विकेंद्रीकरण' (Decentration)—जिसे किसी वस्तु या स्थिति के केवल एक ही आयाम या पहलू पर ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति (अहंकेंद्रवाद या केंद्रीयकरण) से ऊपर उठकर उसके एकाधिक पहलुओं, आयामों या दृष्टिकोणों को एक साथ देखने और विचार करने की मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक संरक्षण (Conservation), बहुआयामी दृष्टिकोण और संज्ञानात्मक परिपक्वता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) की एक अत्यंत विशिष्ट और महत्वपूर्ण सीमा—'अहमकेन्द्रिता या आत्मकेन्द्रिता' (Egocentrism)—जिसके तहत बच्चा यह मान लेता है कि दूसरे लोग भी दुनिया को ठीक वैसे ही देखते, महसूस करते और सुनते हैं जैसे वह खुद देखता है, और वह अन्य व्यक्तियों के दृष्टिकोण (Perspective-taking) को समझने में असमर्थ होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक संज्ञान, विकेंद्रीकरण (Decentration) की प्रक्रिया और संवादात्मक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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