थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,662 times
एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अधिगम नियम—'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ जब कोई तंत्रिका पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह से तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को संतोष (Satisfaction) और आनंद की अनुभूति होती है, जबकि रोके जाने पर झुंझलाहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation), मानसिक तैयारी और अधिगम की प्रभावशीलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
एडवर्ड थार्नडाइक के सीखने के मुख्य नियमों में 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसके अनुसार, जब कोई तंत्रिका पथ किसी कार्य को करने के लिए तैयार होता है और उसे वह कार्य करने दिया जाता है, तो उसे संतोष मिलता है, जिससे अधिगम मजबूत होता है। यदि शिक्षार्थी मानसिक और शारीरिक रूप से सीखने के लिए तैयार नहीं है, तो उस पर थोपा गया ज्ञान प्रभावी नहीं होता। यह नियम कक्षा में विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी, प्रेरणा और सीखने की तत्परता के महत्व को वैज्ञानिक रूप से रेखांकित करता है।
अगला प्रश्न →
एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के संबंधवाद सिद्धांत'…
← पिछला प्रश्न
एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के प्रयास…
Related Questions
→
एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के संबंधवाद सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मुख्य नियम—'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ जब कोई तंत्रिका पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे ऐसा करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को संतुष्टि मिलती है और यदि उसे तैयार होने पर भी कार्य करने से रोका जाता है, तो इससे उसे झुंझलाहट या असंतोष होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी, अभिप्रेरणा और अधिगम पठार (Learning Plateau) के निवारण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अनुसार किसी उद्दीपक और अनुक्रिया (S-R Connection) के बीच का संबंध उन परिणामों द्वारा मजबूत या कमजोर होता है जो उस अनुक्रिया के तुरंत बाद उत्पन्न होते हैं; अर्थात् यदि किसी कार्य का परिणाम संतोषजनक या सुखद होता है, तो वह बंधन मजबूत होता है और यदि परिणाम असंतोषजनक या कष्टप्रद होता है, तो वह कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संतोषजनक अधिगम अनुभवों, सुदृढ़ीकरण और सकारात्मक पुनरावृत्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के नियमों' (Laws of Learning) के अंतर्गत 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक और शिक्षण-शास्त्रीय निहितार्थ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक सटीक है?
→
अधिगम के वक्र (Learning Curves) के विभिन्न प्रकारों—जैसे नतोदर वक्र (Convex Curve), उन्नतोदर वक्र (Concave Curve), एस-आकार वक्र (S-Shaped Curve)—तथा एडवर्ड थार्नडाइक द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम स्थानांतरण के समतअवयव सिद्धांत' (Identical Elements Theory) का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यार्थी गणित की किसी जटिल ज्यामितीय प्रमेय को सीखते समय प्रारंभिक अवस्था में तीव्र गति से प्रगति दर्शाता है और तत्पश्चात अभ्यास के बावजूद उसके निष्पादन में एक समतल स्थिति (पठार) उत्पन्न हो जाती है, तो इस संपूर्ण प्रक्रिया और अधिगम स्थानांतरण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं प्रामाणिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है?
→
एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अधिगम नियम—'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक संप्रत्यय के रूप में परिभाषित किया जाता है जो यह स्पष्ट करता है कि जब कोई स्नायुतंत्र (Nervous System) कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और उसे वैसा करने दिया जाता है, तो इससे व्यक्ति को संतुष्टि और आनंद मिलता है, जबकि इसके विपरीत स्थिति में झुंझलाहट या असंतोष उत्पन्न होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा, मानसिक तैयारी और अधिगम की प्रभावशीलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबद्धतावाद या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)—जिसे उस मूल मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अनुसार किसी अनुक्रिया के बाद यदि संतोषजनक या सुखद परिणाम (Satisfying State of Affairs) प्राप्त होता है, तो उस उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) बंधन या साहचर्य की ताकत बढ़ जाती है, और यदि असंतोषजनक या कष्टदायक परिणाम मिलता है, तो वह बंधन कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सुदृढ़ीकरण, प्रेरणा (Motivation) और अधिगम की प्रभावशीलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के संबंधवादी सिद्धांत' (Connectionism Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय नियम—'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ जब कोई तंत्रिकाीय पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह से तैयार होता है और उसे कार्य करने दिया जाता है, तो यह शिक्षार्थी के लिए संतोषजनक होता है, जबकि तैयार होने पर बाधा उत्पन्न होने पर वह कष्टदायक और अधिगम में बाधक बनता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी, प्रेरणा के स्तर और अनुकूलतम अधिगम परिवेश के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय गौण नियम—'बहु-अनुक्रिया का नियम' (Law of Multiple Responses)—जिसे किसी प्राणी द्वारा किसी नवीन या अनजान समस्या के समाधान के समय तब तक विभिन्न प्रकार के अनेक अलग-अलग व्यवहार या प्रतिक्रियाएं करने की प्रवृत्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है जब तक कि वांछित सफलता प्राप्त न हो जाए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लचीले समस्या-समाधान, संज्ञानात्मक अन्वेषण और अनुकूली व्यवहार के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.