संज्ञानात्मक विकास
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हावर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्राकृतिक बुद्धि' (Naturalistic Intelligence)**—जिसे उस विशिष्ट संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जो व्यक्ति को प्रकृति के विभिन्न रूपों, वनस्पतियों, जीवों, पारिस्थितिक तंत्र और पर्यावरण के सूक्ष्म अंतरों को पहचानने, वर्गीकृत करने और उनके साथ सफलतापूर्वक संवाद स्थापित करने की योग्यता प्रदान करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पर्यावरण-संवेदनशीलता, अनुभवात्मक क्षेत्र-अध्ययन (Field Study) और पारिस्थितिक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
हावर्ड गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत के अनुसार, 'प्राकृतिक बुद्धि' (Naturalistic Intelligence) व्यक्तियों को पौधों, जानवरों और पर्यावरण के अन्य तत्वों को पहचानने और वर्गीकृत करने की क्षमता प्रदान करती है। MPTET और बाल विकास के दृष्टिकोण से, यह बुद्धि केवल प्रकृति प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिक तंत्र की समझ, वर्गीकरण कौशल और विश्लेषणात्मक अवलोकन से जुड़ी है। इसे कक्षा में क्षेत्र-अध्ययन (Field Trips), प्रकृति अन्वेषण और प्रायोगिक विज्ञान परियोजनाओं के माध्यम से प्रभावी ढंग से सुदृढ़ किया जा सकता है। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय के मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक निहितार्थों को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विकेंद्रीकरण' (Decentration)**—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से बालक किसी वस्तु या समस्या के केवल एक ही आयाम (Single Dimension) पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं, गुणों या दृष्टिकोणों को एक साथ देखने और उनमें समन्वय स्थापित करने की योग्यता प्राप्त करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, संरक्षण (Conservation) की अवधारणा और तार्किक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विकेंद्रीकरण' (Decentration)**—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से बालक किसी वस्तु या समस्या के केवल एक ही आयाम या पहलू पर ध्यान केंद्रित करने की अपनी पूर्व प्रवृत्ति (आत्मकेंद्रित चिंतन या Centration) से ऊपर उठकर उसके एकाधिक पहलुओं, गुणों और दृष्टिकोणों का एक साथ वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक संरक्षण (Conservation), बहु-आयामी परिप्रेक्ष्य ग्रहण (Perspective-taking) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development and Discovery Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय प्रतिनिधित्व प्रणाली—**'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation)**—जिसे उस संज्ञानात्मक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक रूप से निरूपित करने के लिए भाषा, प्रतीकों, तार्किक संकेतों और अमूर्त चिन्हों (जैसे गणितीय प्रतीक, वर्णमाला और कोड) का उपयोग करना सीख जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त वैचारिक चिंतन, भाषाई मध्यस्थता और उच्च-स्तरीय तार्किक संश्लेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जॉन फ्लेवेल (John Flavell) द्वारा प्रतिपादित और संज्ञानात्मक मनोविज्ञान के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण संप्रत्यय—**'अधिज्ञान या अधिसंज्ञाज्ञान' (Metacognition)**—जिसे "ज्ञान के बारे में ज्ञान" या अपनी स्वयं की संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं (जैसे- सोचना, सीखना, स्मरण करना और समझना) के बारे में जागरूकता, निगरानी (Monitoring) और स्व-विनियमन (Self-regulation) की उच्च-स्तरीय क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त अधिगम (Autonomous Learning), समस्या-समाधान रणनीतियों के प्रभावी चयन और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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