जीन पियाजे
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage)**—जिसे लगभग 2 से 7 वर्ष की आयु के बीच परिभाषित किया जाता है, जहाँ बालक प्रतीकात्मक विचारों और भाषा का उपयोग करना तो सीख जाता है, किंतु वह केंद्रीय संज्ञानात्मक सीमा—**'आत्म-केंद्रितता' (Egocentrism)**—(अर्थात यह असमर्थता कि बालक इस बात को समझने में विफल रहता है कि अन्य लोग उसके अपने दृष्टिकोण से अलग दृष्टिकोण या विचार भी रख सकते हैं) से ग्रसित होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण (Perspective-taking), संवादात्मक विकास और बहु-आयामी चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (2-7 वर्ष) में बालकों में 'आत्म-केंद्रितता' (Egocentrism) एक प्रमुख संज्ञानात्मक विशेषता होती है। इसका तात्पर्य यह है कि बालक इस बात को समझने में असमर्थ होते हैं कि दूसरा व्यक्ति दुनिया को किस रूप में देखता है या उनका दृष्टिकोण बालक के अपने दृष्टिकोण से भिन्न हो सकता है (जैसे- तीन पर्वतों का प्रयोग)। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में शिक्षकों को यह समझना चाहिए कि इस अवस्था के बालक दूसरों के परिप्रेक्ष्य को समझने में असमर्थ होते हैं, इसलिए उनके सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास के विस्तार के लिए विभिन्न प्रकार की सहयोगात्मक गतिविधियाँ, खेल और रोल-प्ले (Role-play) आयोजित किए जाने चाहिए ताकि वे धीरे-धीरे अन्य दृष्टिकोणों के प्रति जागरूक हो सकें।
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पियाजे के अनुसार, विकास की पहली अवस्था (जन्म से लगभग 2 वर्ष आयु) के दौरान बच्चा सबसे बेहतर सीखता है:
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) की तात्विक और तार्किक सीमाओं का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इस अवस्था की प्रमुख विशेषता 'आत्मकेन्द्रितता' (Egocentrism) और 'अपरिवर्तनीयता' (Irreversibility) के साथ-साथ 'जीववाद' (Animism) की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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पियाजे के अनुसार, 'संज्ञानात्मक विकास' (Cognitive Development) की किस अवस्था में बालक 'तार्किक रूप से' वस्तुओं और घटनाओं के बारे में चिंतन करना शुरू कर देता है?
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पियाजे के अनुसार 'आत्मसात्करण' (Assimilation) क्या है?
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning / Assimilation Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer)**—जिसे उस शैक्षणिक और पेडागोजिकल रणनीति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें शिक्षक नई विषय वस्तु या पाठ पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और ज्ञान के साथ नए आने वालेथ्यों को जोड़ने के लिए उच्च-स्तरीय, समावेशी और परिचयात्मक सामग्रियां प्रस्तुत करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा एकीकरण (Schema Integration), बोधगम्य निवेश (Comprehensible Input) और दीर्घकालिक अर्थपूर्ण स्मरण (Meaningful Retention) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage: संरक्षण, वर्गीकरण, उत्क्रमणीयता (Reversibility) और तार्किक चिंतन का विकास) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe - स्थानिक और मात्रात्मक तार्किकता का प्रसंस्करण), 'पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - संज्ञानात्मक नियंत्रण और मानसिक लचीलापन), तथा 'डorsolateral Prefrontal Cortex' (DLPFC - कार्यशील स्मृति और तार्किक संचालन) के बीच परिपक्व व्हाइट मैटर कनेक्टिविटी, डिस्ट्रीब्यूटेड कॉर्टिकल सिंक्रोनाइजेशन, और सिनैप्टिक प्रूनिंग की सक्रियण गतिकी, तथा ब्रूनर के 'प्रतिनिधित्व के तरीके' (Modes of Representation) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कंक्रीट ऑपरेशनल ऑप्टिमाइज्ड लॉजिकल पेडागोजी' (Neuro-Concrete Operational Optimized Logical Pedagogy) और विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, संरक्षण की समझ व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक प्रक्रिया—**'समायोजन या समंजन' (Accommodation)**—जिसे उस संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक अपने पूर्व-मौजूद मानसिक स्कीमा (Schema) में किसी नई जानकारी, वस्तु या अनुभव के फिट न बैठने पर या तो अपने पुराने स्कीमा में संशोधन करता है या एक नए स्कीमा का निर्माण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वैचारिक पुनर्गठन, संज्ञानात्मक संघर्ष (Cognitive Conflict) के समाधान और उच्च-स्तरीय अनुकूलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक प्रक्रिया—**'आत्मसातीकरण या आत्मीकरण' (Assimilation)**—जिसे उस संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ बालक अपने पूर्व-मौजूद मानसिक स्कीमा (Schema) में किसी नई जानकारी, वस्तु या अनुभव को बिना किसी संरचनात्मक परिवर्तन के सीधे तौर पर समाहित या समायोजित कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान के अनुप्रयोग, संकल्पना निर्माण और तार्किक सरलीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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